बेंगलुरु : कर्नाटक के तुमकुरु जिले में पुलिस ने ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में कामयाब हो गई। यह एक ऐसा केस था, जिसमें पहले मरने वाले की पहचान मुश्किल थी। हत्यारों ने शव के 20 टुकड़े किए थे और हर हिस्से को अलग-अलग फेंका था। हत्यारों ने जहां वारदात को अंजाम दिया, वहां न तो सीसीटीवी कैमरे लगे थे और न ही कोई चश्मदीद गवाह था।
मगर एक क्लू के जरिये पुलिस ने इस वीभत्स घटना की कड़ियां जोड़ लीं और 42 साल की बी. लक्ष्मीदेवी उर्फ लक्ष्मीदेवम्मा के हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया। बेंगलुरु से लगभग 110 किलोमीटर दूर कोराटागेरे के चिम्पुगनहल्ली में बीते 7 अगस्त को एक कुत्ता इंसान के हाथ को मुंह में दबाए घूम रहा था। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंची तो वहां कुछ और नहीं मिला।
फिर पुलिस ने इलाके में बाकी के बॉडी पार्टस की तलाश शुरू कर दी। काफी छानबीन के बाद पांच किलोमीटर के दायरे में 19 अलग-अलग जगहों पर मानव शरीर के टुकड़े मिले, मगर सिर नहीं मिला। ये अवशेष फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए तो पता चला कि किसी महिला की हत्या की गई है। मगर वह महिला कौन थी? इसकी पहचान मुश्किल थी। शुरुआती जांच में पुलिस का माथा उस समय ठनका, जब शव के हिस्सों के साथ पहनी गई जूलरी मिली। इससे यह तय हो गया कि हत्या लूटपाट के इरादे से नहीं की गई है।
फिर पुलिस टीम ने तुमकुरु के थानों से गुमशुदा महिलाओं की लिस्ट खंगालनी शुरू की। जांच में पता चला कि बेल्लवे की रहने वाली 42 साल की बी. लक्ष्मीदेवी उर्फ लक्ष्मीदेवम्मा तीन अगस्त से गायब है। उसके पति बसवराज ने लक्ष्मीदेवी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पेशे से बढ़ई बसवराज ने बताया कि उसकी पत्नी आखिरी बार अपनी बेटी तेजस्विनी के घर हनुमंतपुरा गई थी।
दो दिन बाद कोराटागेरे में एक सुनसान जगह पर सिर मिला। बसवराज ने उसकी पहचान अपनी पत्नी के रूप में की। कर्नाटक पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि क्राइम सीन को देखकर यह अंदाजा लग गया कि महिला की हत्या प्लानिंग के साथ की गई थी। हत्या करने वाला कोई परिचित ही रहा होगा।
इस बीच एसयूवी के मालिक के बारे में जानकारी जुटा रही दूसरी टीम चौंकाने वाला फैक्ट के साथ सामने आई। जो सफेद रंग की एसयूवी सतीश के नाम पर रजिस्टर्ड थी, उसे छह महीने पहले एक डेंटिस्ट डॉ. रामचन्द्रैया एस ने खरीदा था। डेंटिस्ट रामचन्द्रैया बेरहमी से मारी गई लक्ष्मी देवम्मा का दामाद था। पुलिस को अंदाजा हो गया कि यह हत्या लंबी प्लानिंग का नतीजा है। फरेंसिक जांच में एक सच और सामने आया था कि महिला के बॉडी के टुकड़े प्रफेशनल अंदाज में किए गए थे। शक की सूई दामाद रामचन्द्रैया की ओर घूम चुकी थी, बस कड़ियां जोड़कर सच उगलवाना बाकी था।
पुलिस ने रामचन्द्रैया को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया, जहां उसे चौंकाते हुए उन्होंने सतीश और किरण को सीधा उसके सामने बैठाकर सवाल पूछने शुरू किए। सतीश सच छिपा नहीं सका और उसने सब कुछ बता दिया। फिर रामचंन्द्रैया ने भी सच उगल दिया। उसने बताया कि 3 अगस्त को उसने अपनी सास लक्ष्मीदेवम्मा को वापस घर छोड़ने के बहाने एसयूवी में लिफ्ट दिया था।
इस गाड़ी में पहले से ही किरण और सतीश बैठे थे। रामचंद्रैया ने उन्हें 4 लाख रुपये की सुपारी दी थी और एडवांस के तौर पर 50 हजार रुपये दिए थे। गाड़ी में बैठते ही सतीश और किरण ने लक्ष्मीदेवम्मा का गला घोंट दिया। हत्या के बाद शव लेकर तीश के फार्महाउस कोलाला ले गए। 24 घंटे बाद उन्होंने लाश के टुकड़े किए और अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया।
पुलिस ने बताया कि डॉ. रामचन्द्रैया अपनी सास से परेशान था। उसे शक था कि लक्ष्मीदेवम्मा उसकी शादी में दखल दे रही है। उसने आरोप लगाया कि वह अपनी बेटी तेजस्विनी पर गलत काम करने का दबाव बना रही थीं। तेजस्विनी 47 साल के डेंटिस्ट रामचन्द्रैया की दूसरी पत्नी थी और उससे 20 साल छोटी थी। उनका तीन साल का बच्चा भी है। डॉक्टर को डर था कि लक्ष्मीदेवम्मा उसके परिवार को बर्बाद कर देगी, इसलिए उसने 6 महीने पहले हत्या की साजिश रच ली। प्लानिंग के तहत ही उसने सतीश के नाम पर एक सफेद एसयूवी खरीदी ताकि किसी को शक न हो। उसने साजिश रचने के बाद हर कदम पर चतुराई दिखाई, मगर महज सात दिनों की जांच के बाद ही पकड़ा गया।






