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स्वदेशी उत्पाद को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पटेल मैदान में शिल्प उत्सव मेला आयोजित

ठंड के मौसम में खादी एवं हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट जैसे स्वदेशी वस्तुओं का प्रदर्शनी एवं बिक्री की जा रही

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Monday, December 1, 2025

Shilp Utsav Mela organised at Patel Ground to make indigenous products accessible to the masses.

अजय कुमार सहरसा। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए स्वदेशी उत्पाद को जन-जन तक पहुंचाने हेतु शिल्प उत्सव मेला का आयोजन किया गया है। मेला के संयोजक सुधीर शर्मा ने बताया कि स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री को बढ़ाने के लिए देसी उत्पाद द्वारा हस्त निर्मित वस्तुओं की बिक्री की जा रही है।विगत 15 नवंबर से 7 दिसंबर तक चलने वाले इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से स्वदेशी उत्पाद की जमकर बिक्री हो रही है।

उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में खादी एवं हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट जैसे स्वदेशी वस्तुओं का प्रदर्शनी एवं बिक्री की जा रही है। इसमें 16 राज्यों से शिल्प कारीगर शिल्प उत्सव मेला में भाग ले रहे हैं। इस शिल्प उत्सव मेला में खाद्दी निर्मित गर्म कपड़े, ऊनी कपड़े, स्वेटर, साल,बंडी, कुर्ता शर्ट की विशेष मांग हो रही है।उन्होंने कहा कि यह मेला अब अंतिम चरण में है जिसमें कुछ दिन ही शेष बचें है जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र से लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस मेले में लकड़ी से बने फर्नीचर खिलौने एवं खादी ग्रामोद्योग द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक दवाई की विशेष मांग हो रही है। देहरादून से आए पारस आयुर्वेदिक संस्था के प्रतिनिधि अतुल त्रिवेदी ने बताया कि स्वदेशी उत्पाद को जन-जन तक पहुंचने के लिए खादी ग्रामोद्योग बोर्ड एवं शिल्प मेला के अंतर्गत भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों में अपनी दुकान लगाकर लोगों को फायदा पहुंचा रहे हैं।उन्होंने कहा कि हमारे यहां आयुर्वेद की हर मर्ज की दवा मौजूद है जो काफी किफायती गुणकारी व असरदार है।

सर्दियों में खासकर शुद्ध एवं क्वालिटी युक्त गुड़ से बनी च्यवनप्राश की खूब बिक्री हो रही है।वहीं दर्द निवारक,शुगर, हार्ट,बवासीर, बीपी,गैस सहित अन्य दवाई लोगों के लिए आयुर्वेद में रामबाण सिद्ध हो रहा है।उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री के द्वारा भी स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। वहीं विदेशी वस्तुओं के खरीदने पर हमारी अर्थव्यवस्था कमजोर एवं खोखली साबित हुई है।

ऐसे में स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी कर अपने देश की अर्थव्यवस्था को सुदृद्ध करना हम सभी नागरिक का नैतिक कर्तव्य बनता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुएं जहां एक और गुणवत्ता एवं सस्ते दर के लिए प्रसिद्ध माना गया है जबकि विदेशी कंपनी गुणवत्ता को छोड़कर सिर्फ फायदे के लिए अपने प्रोडक्ट को महंगी विज्ञापनों के जरिए बेचते हैं। वही ग्राहक विदेशी वस्तु खरीद कर अपने स्वास्थ्य एवं धन दोनों को बर्बाद कर रहे हैं। भारत सरकार के द्वारा स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री के लिए किया गया प्रयास काफी प्रशंसनीय वह सराहनीय है।

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