जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों से सम्बन्धित बैठक सम्पन्न हुई। - प्रदेश मंत्री नवीन अग्रवाल तथा जिला संगठन मंत्री एवं वरिष्ठ समाजसेवी अशोक खंडेलवाल की मौजूदगी में मनोनयन पत्र सौंपे। - मॉडिफाइड साइलेन्सर के विरुद्ध चलाया गया विशेष अभियान - विनोद राय की माताजी के ब्रह्मभोज में जुटे शुभचिंतक, अजीम आलम और दुर्गेश राय ने अर्पित किए श्रद्धा-सुमन - रमनगरा क्षेत्र में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत चला सफाई अभियान।जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों से सम्बन्धित बैठक सम्पन्न हुई। - प्रदेश मंत्री नवीन अग्रवाल तथा जिला संगठन मंत्री एवं वरिष्ठ समाजसेवी अशोक खंडेलवाल की मौजूदगी में मनोनयन पत्र सौंपे। - मॉडिफाइड साइलेन्सर के विरुद्ध चलाया गया विशेष अभियान - विनोद राय की माताजी के ब्रह्मभोज में जुटे शुभचिंतक, अजीम आलम और दुर्गेश राय ने अर्पित किए श्रद्धा-सुमन - रमनगरा क्षेत्र में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत चला सफाई अभियान।

बाढ़ग्रस्त गांवों में अंतिम संस्कार की गंभीर समस्या, सड़क किनारे करने पड़ रहे शवों के अंतिम संस्कार

बाढ़ का कहर: जलमग्न घाटों के कारण सड़क किनारे अंतिम संस्कार को मजबूर ग्रामीण

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Saturday, August 8, 2026

फर्रुखाबाद। जनपद की अमृतपुर तहसील के गंगा पार क्षेत्र के दर्जनों गांव इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ के चलते जहां जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है

बाढ़ से जलमग्न हुए पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल

वहीं ग्रामीणों के सामने अपनों के शवों के अंतिम संस्कार की एक गंभीर और संवेदनशील समस्या खड़ी हो गई है। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ आने के कारण गंगा किनारे स्थित पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इसके अलावा, गांवों से नदी तक जाने वाले सभी रास्ते भी पानी में डूबे हुए हैं, जिससे शवों को पारंपरिक घाटों तक ले जाना असंभव हो गया है। अंतिम संस्कार के लिए उचित स्थान न मिलने के कारण ग्रामीण मजबूरी में फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग के किनारे, कुठिला झील के पास भोले बाबा मंदिर के निकट सड़क के किनारे अंतिम संस्कार करने को विवश हैं।

जनजीवन और पशुओं के सामने भी बड़ा संकट

बाढ़ का प्रकोप जीवन के हर पहलू पर भारी पड़ रहा है। कई गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट चुका है, जिससे खाने-पीने की जरूरी वस्तुएं जुटाना मुश्किल हो गया है। पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों के लिए चारे और सुरक्षित स्थानों की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए उचित स्थान न मिल पाना शोक संतप्त परिवारों के दुख को और अधिक बढ़ा रहा है।

ग्रामीणों की प्रशासन से मांग

स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि बाढ़ का पानी कम होने तक किसी सुरक्षित ऊंचे स्थान को अस्थायी अंत्येष्टि स्थल के रूप में चिन्हित किया जाए, ताकि शोक में डूबे परिवारों को अपनों का अंतिम संस्कार सम्मानजनक तरीके से करने की सुविधा मिल सके। इस संवेदनशील संबंध में जब एडीओ पंचायत अजीत पाठक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका पक्ष नहीं मिल सका। फिलहाल ग्रामीण बाढ़ की इस प्राकृतिक आपदा के बीच मूलभूत और जरूरी सुविधाओं के साथ-साथ अपनों की अंतिम विदाई जैसी संवेदनशील व्यवस्था के लिए भी कड़ा संघर्ष करने को मजबूर हैं।

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