धनतेरस पर अनमोल टीवी के ‘हमारी राधा’ की अभिनेत्री सिमरन कौर ने बताया, क्यों यह त्यौहार सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं है: “प्यार से परिपूर्ण घर ही असली दौलत है” - झालमुड़ी बेचकर संवारी परिवार की जिंदगी, 47 साल से बराकर की रेल पटरियों पर गूंज रही राज कुमार की मेहनत की कहानी - नेकपुर चौरासी में आबकारी विभाग की छापेमारी - कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन ने जिला स्तरीय राज्योत्सव कार्यक्रम की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का लिया जायजा - जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति एवं टास्क फोर्स समिति की बैठक सम्पन्नधनतेरस पर अनमोल टीवी के ‘हमारी राधा’ की अभिनेत्री सिमरन कौर ने बताया, क्यों यह त्यौहार सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं है: “प्यार से परिपूर्ण घर ही असली दौलत है” - झालमुड़ी बेचकर संवारी परिवार की जिंदगी, 47 साल से बराकर की रेल पटरियों पर गूंज रही राज कुमार की मेहनत की कहानी - नेकपुर चौरासी में आबकारी विभाग की छापेमारी - कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन ने जिला स्तरीय राज्योत्सव कार्यक्रम की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का लिया जायजा - जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति एवं टास्क फोर्स समिति की बैठक सम्पन्न

शिव विवाह कथा में उमड़ा श्रद्धा का सागर, बेटियों पर दिया भावनात्मक संदेश

सरसावा।। नगर के शुगर मिल परिसर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में सोमवार को आचार्य कुलदीप दीक्षित ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि जब राक्षस तारकासुर ने देवताओं पर आतंक फैलाया,

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Monday, July 21, 2025

सरसावा।। नगर के शुगर मिल परिसर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में सोमवार को आचार्य कुलदीप दीक्षित ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि जब राक्षस तारकासुर ने देवताओं पर आतंक फैलाया, तो उसका वध केवल शिव पुत्र द्वारा ही संभव था। इसके लिए भगवान शिव की तपस्या भंग कर, उनका माता पार्वती से विवाह कराया गया। कथा के दौरान आचार्य दीक्षित ने पिता-पुत्री के रिश्ते पर विशेष चर्चा करते हुए कहा कि जब किसी पिता की बेटी विदा होती है, तो वह भीतर से टूट जाता है, पर उसे व्यक्त नहीं करता। माँ के बाद यदि कोई स्त्री पुरुष का सबसे ज़्यादा ध्यान रखती है, तो वह उसकी बेटी होती है। उन्होंने कहा कि बेटियाँ भले जानती हैं कि उन्हें एक दिन ससुराल जाना है, फिर भी वे चार बेटों से अधिक अपने पिता से प्रेम करती हैं। उन्होंने वर्तमान समय में विवाह के बाद टूटते संबंधों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसका कारण संस्कारों की कमी है। इसलिए जरूरी है कि बेटियों को अच्छे संस्कार दें और रामायण जैसे ग्रंथों का अध्ययन करें, जो परिवार को जोड़कर चलना सिखाते हैं। कथा में उन्होंने सास-बहू के रिश्ते को भी छुआ और कहा कि बहू को अगर बेटी जैसा मान लिया जाए, तो वह भी सास-ससुर को माँ-बाप का दर्जा देती है। इससे परिवार में प्रेम और आदर की भावना बनी रहती है। कथा से पूर्व आचार्य राहुल कृष्णन ने विधिवत पूजन कराया। कार्यक्रम में यशपाल, दीपक, राजन, पूर्वी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

खबरें और भी

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले