जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों से सम्बन्धित बैठक सम्पन्न हुई। - प्रदेश मंत्री नवीन अग्रवाल तथा जिला संगठन मंत्री एवं वरिष्ठ समाजसेवी अशोक खंडेलवाल की मौजूदगी में मनोनयन पत्र सौंपे। - मॉडिफाइड साइलेन्सर के विरुद्ध चलाया गया विशेष अभियान - विनोद राय की माताजी के ब्रह्मभोज में जुटे शुभचिंतक, अजीम आलम और दुर्गेश राय ने अर्पित किए श्रद्धा-सुमन - रमनगरा क्षेत्र में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत चला सफाई अभियान।जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों से सम्बन्धित बैठक सम्पन्न हुई। - प्रदेश मंत्री नवीन अग्रवाल तथा जिला संगठन मंत्री एवं वरिष्ठ समाजसेवी अशोक खंडेलवाल की मौजूदगी में मनोनयन पत्र सौंपे। - मॉडिफाइड साइलेन्सर के विरुद्ध चलाया गया विशेष अभियान - विनोद राय की माताजी के ब्रह्मभोज में जुटे शुभचिंतक, अजीम आलम और दुर्गेश राय ने अर्पित किए श्रद्धा-सुमन - रमनगरा क्षेत्र में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत चला सफाई अभियान।

ब्लॉक में महज 150 मीटर की ‘तिरंगा यात्रा’ पर उठे सवाल,यात्रा सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित

ब्लॉक परिसर से निकली यात्रा नेहरू कॉलेज गेट तक पहुंचकर थमी, बाजार और मुख्य मार्ग से न गुजरने पर लोगों ने उठाए सवाल

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Thursday, August 13, 2026

फर्रुखाबाद।

स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर देश भर में देशभक्ति का माहौल बनाने और नागरिकों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को जनपद फर्रुखाबाद के नवाबगंज ब्लॉक परिसर से एक तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसका नेतृत्व खंड विकास अधिकारी अमरेश चौहान ने किया। हालांकि, यह यात्रा महज 150 मीटर की दूरी तय कर नेहरू कॉलेज के गेट पर ही समाप्त हो गई, जिसके बाद से यह क्षेत्र में चर्चा और बहस का मुख्य विषय बन गई है।
महज 150 मीटर का सफर: ब्लॉक परिसर से शुरू हुई तिरंगा यात्रा बिना मुख्य मार्गों या बाजारों में जाए, मात्र 150 मीटर की दूरी पर नेहरू कॉलेज के गेट पर समाप्त हो गई।


जनता की उम्मीदें और मायूसी:
स्थानीय लोगों का मानना था कि यदि यात्रा का मुख्य उद्देश्य आमजन में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाना था, तो इसे कस्बे के मुख्य बाजारों और प्रमुख चौराहों से निकाला जाना चाहिए था।


औपचारिकता का आरोप:
स्थानीय निवासियों और दुकानदारों का कहना है कि मुख्य बाजार में रोजाना भारी भीड़ और राहगीरों की आवाजाही होती है। वहां से यात्रा गुजरने पर संदेश दूर-दूर तक पहुंचता, लेकिन इसे केवल ‘फोटो सेशन’ और औपचारिकता पूरी करने तक सीमित रख दिया गया।
प्रशासन की चुप्पी:
तिरंगा यात्रा के इस तरह अचानक और बहुत कम दूरी पर सिमट जाने को लेकर लोगों ने तीखे सवाल उठाए हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर ब्लॉक प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बढ़ता असंतोष और चर्चाएं
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि सरकारी स्तर पर होने वाले आयोजनों का वास्तविक लाभ और प्रभाव तभी देखने को मिलता है, जब उनमें व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए। केवल औपचारिकता निभाने से ऐसे राष्ट्रीय आयोजनों का मूल उद्देश्य पीछे छूट जाता है। फिलहाल, इस छोटी सी तिरंगा यात्रा को लेकर पूरे नवाबगंज क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं का दौर जारी है।

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