राजकुमार पाठक
बांदा/लो, अब जन चौपाल में समस्याओं के समाधान के नाम पर भी कमाल की खबरे आकर न केवल सुर्खियां बटोरने लगी बल्कि शिकायत बन कर जांच और कार्यवाही की फरियाद भी करने लगी। जिले के गांव में जन चौपाल लगाकर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों और गांव की सुनी जाने वाली समस्याओं के समाधान के नाम पर वसूली के आरोपों की शिकायत का दौर प्रकाश मे आया है। जिलाधिकारी को संबोधित एक शिकायती पत्र में, ग्राम पिंडखर के प्रधान ने शिकायत करते हुए है लिखा है कि 16 जनवरी को लगाई गई चौपाल में, जिला विकास अधिकारी संग पहुंचे, एक बाबू द्वारा पैसे मांगने का आरोप लगाया है।
बताते चले कि जन शिकायती के निस्तारण और समस्या समाधान के लिए समाधान दिवस मनाया जाता है। कोई जनता समस्या से पीड़ित और परेशान न हो इसके के लिए सरकार द्वारा गांव गांव में जन चौपाल लगाकर ग्रामीण और गांव की समस्याओं को सुनकर समाधान करने की व्यवस्था बनाई गई है। विकास और समस्या समाधान की आड़ में जिम्मेदार यहां भी कमाई की बाजार बनाने पर अमादा हो रहे हैं। यह खुलासा तब हों गया, जब बीती 16 जनवरी को बिसंडा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पिंडखर में चौपाल का आयोजन किया गया था।
जिसपर ग्राम प्रधान सहित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बताया कि जन चौपाल के नोडल अधिकारी जिला विकास अधिकारी थे ,उनके साथ एक बाबू भी आया था, जिसके द्वारा ग्राम वासियों के सामने प्रधान से 20 हजार रुपए की मांग की गई ,जब प्रधान ने पैसे न होने के बात कही तो प्रधान की तलाशी ली गई और जेब में पड़े पैसे ले लिए गए और मांग के मुताबिक कम पैसे मिलने के कारण प्रधान की शिकायत है कि फोन पे बैलेंस भी चेक किया गया और शाम तक शेष पैसा पहुचा देने का अल्टीमेटम देते हुए कहा गया कि समय से पैसे न देने की अन्यथा की दशा में कार्यवाही की धमकी भी दी गई।
सच और झूठ क्या हैं यह तो गंभीर जांच का विषय है लेकिन शिकायत पत्र में कहा गया है कि मेरी छोटी ग्राम पंचायत है, धनाभाव के कारण पंचायत कार्यालय का भवन एक कमरे में बना हुआ है जहां से सब कामकाज संचालित होते है, लेकिन बार बार जिला विकास कार्यालय द्वारा पत्र भेज कर और अन्य तरीकों का प्रयोग कर पैसा मांगने का लगातार प्रयास जारी है। पता चला है कि हर एक नोडल अधिकारी को दो दो गांव का प्रभार मिला हुआ है, इस गांव का प्रभार जिला विकास अधिकारी के पास है हालांकि मिली जानकारी के मुताबिक उनके पास जिम्मेदारी भरे तीन पदो का अतरिक्त प्रभार भी है इसलिए बताते चले कि उनके पास मात्र 6 गावों की जिम्मेदारी हर जहां जन चौपाल लगाकर ग्रामीण/हैं समस्याओं का समाधान करना इनकी जिम्मेदारी के बही खाते में आता है लेकिन जब यह ग्राम पिंडखर की जन चौपाल लगाने पहुंचे तो उनके साथ एक बाबू था, जिसे ग्रामीण वसूलीबाज बताते है, जिसको जिलाधिकारी को सौंपी गई शिकायत में नामजद भी किया गया है।
शिकायती पत्र में गांव के प्रधान अनूप विश्वकर्मा सहित ग्रामीण रमेश, अवधेश, बच्चीलाल, विवेक सहित कई ग्रामीणों के मौजूद हस्ताक्षर, लगाए गए आरोपों की गवाही देते नजर आते है। जिलाधिकारी से जरिए शिकायती पत्र से फरियाद करके जहां दोषी जनों पर जांच कर कार्यवाही की मांग की है, वहीं अवैध रूप से वसूली के खिलाफ मोर्चा खोल कर, परेशान करने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि ग्राम पंचायत चौपालो के नाम वसूली का सिलसिला बंद नहीं हुआ, तो कई शासन की योजनाएं धरी की धरी रह जाएंगी। अब पिंडखर के प्रधान संग स्थानीय ग्रामीणों को जांच और कार्यवाही की तस्वीर का इंतजार बेसब्री से है, अब देखने वाली बात है कि आगे आगे होता है क्या..!..?







