कार्यक्रम में बुजुर्गों एवं कार्यकर्ताओं को किया गया सम्मानित। - नरेन्द्र मोदी ने हॉर्नबिल महोत्सव को भारत की सांस्कृतिक भव्यता और पूर्वोत्तर के बढ़ते आत्मविश्वास का उत्सव बताने वाले एक लेख को साझा किया - द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्रदान किए - फेरों से पहले टूटी शादी; दूल्हा 20 लाख रुपए, कार की मांग पर अड़ा, बारात लौटी - बुंदेलखंड यंग अचीवर्स अवार्ड– 2025 समारोह में वेदिका फाउंडेशन को मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने किया सम्मानितकार्यक्रम में बुजुर्गों एवं कार्यकर्ताओं को किया गया सम्मानित। - नरेन्द्र मोदी ने हॉर्नबिल महोत्सव को भारत की सांस्कृतिक भव्यता और पूर्वोत्तर के बढ़ते आत्मविश्वास का उत्सव बताने वाले एक लेख को साझा किया - द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्रदान किए - फेरों से पहले टूटी शादी; दूल्हा 20 लाख रुपए, कार की मांग पर अड़ा, बारात लौटी - बुंदेलखंड यंग अचीवर्स अवार्ड– 2025 समारोह में वेदिका फाउंडेशन को मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

मोदी ने पवित्र पिपरहवा निशानियों की 127 वर्षों के बाद देश में वापसी का स्वागत किया

नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी ने आज भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा निशानियों की 127 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देश में वापसी की सराहना करते हुए इसे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक गौरवपूर्ण और खुशी का क्षण बताया।‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Wednesday, November 5, 2025

नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी ने आज भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा निशानियों की 127 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देश में वापसी की सराहना करते हुए इसे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक गौरवपूर्ण और खुशी का क्षण बताया।‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना को प्रतिबिंबित करते हुए एक वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध के उपदेशों के प्रति भारत की अपार श्रद्धा तथा अपनी आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के प्रति राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाया।

एक्स पर एक पोस्ट में श्री मोदी ने लिखा:

“हमारी सांस्कृतिक विरासत के लिए एक खुशी का दिन!

भगवान बुद्ध की पवित्र पिपरहवा निशानियां 127 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद स्वदेश वापस आ गई हैं, यह जानकर हर भारतीय को गर्व होगा। ये पवित्र निशानियां भगवान बुद्ध और उनकी महान शिक्षाओं के साथ भारत के घनिष्ठ संबंध को दर्शाती हैं। यह हमारी गौरवशाली संस्कृति के विभिन्न पहलुओं के संरक्षण और सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। #विकास भी विरासत भी”

“यह स्मरणीय है कि पिपरहवा निशानियां 1898 में खोजी गई थीं, किंतु औपनिवेशिक काल के दौरान इन्हें भारत से बाहर ले जाया गया था। जब इस वर्ष की शुरुआत में ये एक अंतरराष्ट्रीय नीलामी में दिखाई दीं, तो हमने यह सुनिश्चित करने के लिए काम किया कि ये स्वदेश वापस आ जाएं। मैं इस प्रयास में शामिल सभी लोगों की सराहना करता हूं।”

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