नरेन्द्र मोदी ने केरलमम के एर्नाकुलम में लगभग 11,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया - साइबर क्राइम सोनभद्र ने ऑनलाइन ठगी के तीन अभियुक्त दबोचे, एर्टिगा कार बरामद - ओबरा पुलिस ने 1.1 किग्रा गांजा के साथ अभियुक्त गिरफ्तार, मोटरसाइकिल सीज - एएसपी मुख्यालय ने चुर्क पुलिस लाइन में परेड सलामी ली, वाहनों-उपकरणों की गहन जाँच - 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत, अधिकतम मामलों के निस्तारण की तैयारीनरेन्द्र मोदी ने केरलमम के एर्नाकुलम में लगभग 11,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया - साइबर क्राइम सोनभद्र ने ऑनलाइन ठगी के तीन अभियुक्त दबोचे, एर्टिगा कार बरामद - ओबरा पुलिस ने 1.1 किग्रा गांजा के साथ अभियुक्त गिरफ्तार, मोटरसाइकिल सीज - एएसपी मुख्यालय ने चुर्क पुलिस लाइन में परेड सलामी ली, वाहनों-उपकरणों की गहन जाँच - 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत, अधिकतम मामलों के निस्तारण की तैयारी

नरेन्द्र मोदी ने पुत्रियों के महत्व और शक्ति को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषितम साझा किया

भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बना रही हैं और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Thursday, January 22, 2026

Narendra Modi shares Sanskrit Subhashitam highlighting the importance and power of daughters

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस देश में पुत्रियों को लक्ष्मी के समान पूजा जाता है, वहां आज से 11 वर्ष पहले इसी दिन ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान आरंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत गर्व की बात है कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बना रही हैं और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

प्रधानमंत्री ने पुत्रियों के महत्व पर आधारित शाश्वत भारतीय मूल्यों को प्रतिबिंबित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“दशपुत्रसमा कन्या दशपुत्रान् प्रवर्धयन्। यत् फलम् लभते मर्त्यस्तल्लभ्यं कन्ययैकया॥”

सुभाषितम् का अर्थ है कि एक पुत्री दस पुत्रों के समान है, और दस पुत्रों से प्राप्त पुण्य या सद्गुण एक पुत्री से भी प्राप्त किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पोस्ट पर लिखा;
“कन्या को लक्ष्मी मानने वाले हमारे देश में 11 साल पहले आज ही के दिन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत हुई थी। यह बड़े गर्व की बात है कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नित-नए रिकॉर्ड बना रही हैं।

दशपुत्रसमा कन्या दशपुत्रान् प्रवर्धयन्।
यत् फलम् लभते मर्त्यस्तल्लभ्यं कन्ययैकया॥”

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