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“सांप का वार, अस्पताल में ही उपचार!”

भारत सीरम्स एंड वैक्सीन्स लिमिटेड और मैनकाइंड फार्मा लिमिटेड द्वारा जनहित में जारी।  मुंबई (अनिल बेदाग) : मानसून के मौसम में सांप के काटने के मामले बढ़ जाते हैं, खासकर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में जहाँ हरियाली ज्यादा होती है। भारत में सांप के काटने की घटनाएं

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Thursday, July 17, 2025

भारत सीरम्स एंड वैक्सीन्स लिमिटेड और मैनकाइंड फार्मा लिमिटेड द्वारा जनहित में जारी। 

मुंबई (अनिल बेदाग) : मानसून के मौसम में सांप के काटने के मामले बढ़ जाते हैं, खासकर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में जहाँ हरियाली ज्यादा होती है। भारत में सांप के काटने की घटनाएं एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन  के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 4.5 से 5.4 मिलियन लोगों को सांप काट लेते हैं । इनमें से 1.8 से 2.7 मिलियन मामलों में ज़हर का असर होता है। दुनिया में सांप के काटने से सबसे ज्यादा मौतें भारत में होती हैं। 2000 से 2019 के बीच भारत में करीब 12 लाख लोगों की मौत सांप के काटने से हुई है, यानी हर साल लगभग 58,000 मौतें।

दुर्भाग्य से, ये आंकड़े पूरी तरह दर्ज नहीं हो पाते। सरकारी रिपोर्ट्स में सिर्फ 10% मौतें ही दिखाई गईं, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 20-30% लोग ही अस्पताल जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में सांप के काटने से मरने का खतरा 1 में से 100 तक है। अधिकतर पीड़ित 30 से 69 वर्ष की आयु के होते हैं, और 25% से ज़्यादा बच्चे 15 साल से कम उम्र के होते हैं। कुल 70% मौतें आठ प्रमुख राज्यों में होती हैं, खासकर मानसून के समय। भारत में 90% मामलों में चार प्रमुख सांपों का हाथ होता है –  कॉमन क्रेट, इंडियन कोबरा, रसेल वाइपर और सॉ स्केल्ड वाइपर।

सांप का ज़हर शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे शरीर में खून बहना, लकवा मारना, किडनी फेल होना, दिल पर असर, मांसपेशियों का टूटना और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि पीड़ित को तुरंत नज़दीकी अस्पताल ले जाया जाए। सबसे अच्छा इलाज क्वालिटी एंटी-वेनम देना है, जो ज़हर का असर कम कर सकता है और जान बचा सकता है। यह इलाज सुरक्षित होता है और इसका असर व्यापक होता है।

ज्यादातर मामले ग्रामीण इलाकों में होते हैं। 30-50 साल के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। करीब 60-80% मामलों में सांप ने पैरों या टखनों पर काटा होता है। इसका कारण है नंगे पांव काम करना और पारंपरिक खेती के तरीके। साथ ही, खराब रोशनी और घरों की स्थिति के कारण सांप आसानी से घरों में घुस जाते हैं।

देरी से इलाज, गलत प्राथमिक उपचार और घरेलू नुस्खों पर भरोसा करना स्थिति को और बिगाड़ देता है। कई लोग पहले देसी इलाज या ओझा-तांत्रिक की शरण लेते हैं, जिससे हालात गंभीर हो जाते हैं। 

भारत में ‘सांप काटने की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना’ बनाई गई है, जो राज्यों को खुद की योजना बनाने में मदद करती है। इसमें ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण अपनाया गया है, जो लोगों, पशुओं और पर्यावरण को जोड़ता है। इसमें गुणवत्तापूर्ण एंटी-वेनम तक पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, जन-जागरूकता कार्यक्रम और निगरानी प्रणाली शामिल हैं।

अगर सांप काट ले तो क्या करें:

• घबराएं नहीं, शांत रहें और शरीर की हरकतें कम करें — इससे ज़हर धीरे फैलेगा।

• गहने या टाइट कपड़े तुरंत हटा दें।

• जिस हिस्से को सांप ने काटा है उसे दिल से नीचे रखें।

• मरीज को बाईं ओर लिटाएं, दायां पैर मुड़ा हुआ हो और सिर हाथ से सहारा दिया जाए।

• तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएं।

क्या नहीं करना चाहिए:

• ज़ख्म को न धोएं।

• काटे गए हिस्से को कसकर न बांधें।

• बर्फ या ठंडी चीज़ें न लगाएं।

• ज़ख्म को न काटें और न ही ज़हर चूसें।

• शराब या कैफीन युक्त चीज़ें न लें।

• दर्द होने पर खुद से दवा न लें।

• ज़्यादा चलने या भागने से बचें।

• सांप को मारने या पकड़ने की कोशिश न करें।

• देसी इलाज या घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें।

सावधानी के उपाय:

• खेतों में काम करते समय हमेशा जूते पहनें।

• घरों में पर्याप्त रोशनी रखें।

• आस-पास की जगह साफ रखें ताकि सांप न आएं।

• मानसून के दौरान खास सावधानी बरतें।

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