मधुपुर में पत्रकारों का होली मिलन समारोह धूमधाम से संपन्न - सपा कार्यकर्ताओं ने दलित बस्ती में बच्चों के साथ मनाई होली, प्रमोद यादव ने दिया 'सच्चे समाजवाद' का संदेश - सोनभद्र में गांजा तस्करी का बड़ा खुलासा: 85 किलो से ज्यादा गांजे के साथ एक तस्कर गिरफ्तार - सोनभद्र: पन्नूगंज साइबर टीम ने सऊदी नौकरी के नाम पर ठगे गए ₹35,000 कराए वापस - सोनभद्र पुलिस की त्वरित कार्रवाई: घोरावल साइबर टीम ने ठगी के ₹40,000 वापस कराएमधुपुर में पत्रकारों का होली मिलन समारोह धूमधाम से संपन्न - सपा कार्यकर्ताओं ने दलित बस्ती में बच्चों के साथ मनाई होली, प्रमोद यादव ने दिया 'सच्चे समाजवाद' का संदेश - सोनभद्र में गांजा तस्करी का बड़ा खुलासा: 85 किलो से ज्यादा गांजे के साथ एक तस्कर गिरफ्तार - सोनभद्र: पन्नूगंज साइबर टीम ने सऊदी नौकरी के नाम पर ठगे गए ₹35,000 कराए वापस - सोनभद्र पुलिस की त्वरित कार्रवाई: घोरावल साइबर टीम ने ठगी के ₹40,000 वापस कराए

समुद्र मंथन से निकले विष का पान कर नीलकंठ बने महादेव : स्वामी ब्रह्म स्वरूपानंद

भागवत कथा के दौरान अमृत वचन के रूप में स्वामी ब्रह्म स्वरूपानंद महाराज ने कहा कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को महादेव ने पी लिया था जिस कारण उनका नाम नीलकंठ महादेव पड़ा

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Friday, September 19, 2025

वरदान, दैनिक अयोध्या टाइम्स संवाददाता रामपुर मनिहारान
भागवत कथा के दौरान अमृत वचन के रूप में स्वामी ब्रह्म स्वरूपानंद महाराज ने कहा कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को महादेव ने पी लिया था जिस कारण उनका नाम नीलकंठ महादेव पड़ा।
गांव मुकंदपुर में सरपंच परिवार के तत्वाधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान स्वामी ब्रह्म स्वरूपानंद ने बताया कि समुद्र मंथन के दौरान 14 रत्न प्राप्त हुए थे लेकिन सबसे पहले विष निकला था विष को ग्रहण करने के लिए कोई स्थान नहीं मिला क्योंकि विष जहां भी गिर जाता वहीं से हमेशा हमेशा के लिए दुनिया समाप्त हो जाती। जहरीले विष का पान भगवान शिव महादेव ने कर अपने कंठ में रोक लिया था जिस कारण उनका नाम नीलकंठ महादेव पड़ा।

महाराज ने कहा कि अमृत के पीने को दैत्य लोग बड़े आतुर थे उनकी इच्छा थी कि अमृत का पीकर दैत्य व देवलोक के भी स्वामी बन जाए। लेकिन विश्व मोहिनी ने अपने ज्ञान गुण शक्ति से अमृत का दैत्यों को पान नहीं करने दिया। भगवान राम हो या फिर कृष्ण दोनो ही भगवान विष्णु का अवतार हैं जिन्होंने जगत के कल्याण के लिए अधर्म पर धर्म की विजय के लिए ही अवतार लिया था ।

कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं को भक्ति सागर में डुबकी लगाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के पुत्रों की पूजा नहीं होती इसी प्रकार भगवान श्री राम के भी पुत्रों की पूजा नहीं होती लेकिन समुद्र मंथन में निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया था इसी कारण आज भी उनके पुत्रों सहित शिव परिवार की पूजा की जाती है। महाराज जी द्वारा बीच-बीच में भगवान श्री कृष्ण के अवतार पर सुंदर से सुंदर गीतों की प्रस्तुति की गई जिस पर श्रद्धालु लोग उठकर झूमने को मजबूर हो गए। वृंदावन बिहारी लाल की जय राधे राधे के जय घोष से कथा पंडाल पूरा गूंज उठा। कहा कि पितृपक्ष में श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने या फिर अपने घरों में पाठ करने से पितरों पूर्वजो की आत्मा को विशेष शांति प्राप्त होती है वहीं पितृ प्रसन्न होकर अपने परिवार को भी आशीर्वाद देते है।

पितृपक्ष में ब्राह्मणों सहित गाय व अन्य पशु पक्षियों कीट पतंगो को भी भोजन कराना शुभ व लाभ प्रद माना गया है। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक देवेंद्र निम् ने श्रीमद् भागवत कथा के बीच पहुंचकर कथावाचक स्वामी ब्रह्मा स्वरूपानंद जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया वह उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान राम कथा श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन होते रहने चाहिए संगत से व्यक्ति को मार्गदर्शन प्राप्त होता है वह व्यक्ति अधर्म के रास्ते से हटकर धर्म के रास्ते पर चलने का प्रयास करता है। इस दौरान पूर्व प्रधान ईसम सिंह उर्फ देवेंद्र सिंह,यतेंद्र सिंह,नरेंद्र सिंह राजेंद्र सिंह,बलराज पंवार, जयराज पंवार,अटल पंवार आदि का भरपूर सहयोग रहा जबकि काफी संख्या में स्त्री पुरुष मौजूद रहे कथा के अंत में आए हुए सभी श्रद्धालुओं को सरपंच परिवार की ओर से प्रसाद वितरित किया गया।

खबरें और भी

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले