सहारनपुर । आस्था हमे अंधानुकरण नहीं चिंतन का रास्ता देती है। महा शिवरात्रि पर्व हमें पांच तत्वों की शक्ति, सभी में छिपी दिव्यता को पहचानने की दृष्टि और सर्वव्यापी और सभी को भेदभाव रहित वरदान देने वाले विराट शिव की भक्ति की प्रेरणा देती है। शिव स्वयं भू होने से अनादि और अजन्मे, दिगम्बर होने से विराट, भोले होने से निष्पाप व निष्कलंक, सभी का भरण पोषण करने से भंडारी और विष की कटुता को अपने कंठ में धारण करके सबकी रक्षा कर लेने से गरलकंठ हैं। वो समुद्र मंथन के लिए अपना वासुकी नाग दे देते हैं क्योंकि चिंतन मंथन से ही अमृत समेत विश्व का कल्याण करने वाले चौदह रत्न प्राप्त होते हैं।
मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योग संस्थान में आज महामृत्युंजय यज्ञ और रुद्राभिषेक के बाद आश्रम साधकों और नेशन बिल्डर्स एकेडमी के नन्हे भारतयोगियों से संवाद करते हुए पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने कहा कि समुद्रमंथन हमे निरंतर करना ही चाहिए, इस मंथन का ही ये परिणाम था कि शिवरात्रि को ही बालक मूलशंकर महर्षि दयानंद सरस्वती बन गये। शिवरात्रि न होती तो राष्ट्र धर्म उद्धारक दयानंद भी नहीं होते। उन्होंने हिंदुत्व और भारत राष्ट्र को महापुरुषों पंथों व जातियों के नाम पर बांटने को पाप कर्म और आध्यात्मिक अपराध व समाज तोड़ने की साजिश बताया। अंतर्राष्ट्रीय योगगुरु स्वामी भारत भूषण ने कहा कि योगीराज भगवान शिव के नाम पर नशा व योगेश्वर कृष्ण के नाम पर भड़काऊ रास लीलाएं दुनिया को धर्म और अध्यात्म की राह दिखाने वाले हिंदुत्व का अपमान है।
गुरुदेव ने योगीराज शिव और योगेश्वर कृष्ण को प्रसन्न करने का मंत्र दिया “योग साधना और मन को बांधना”! अनुष्ठान आचार्य पंडित सुनील शर्मा अधिष्ठाता एन के शर्मा योगाचार्य आलोक श्रीवास्तव, योगाचार्य अनीता शर्मा, ललित वर्मा विजय सुखीजा मनोज डा अशोक मंजू गुप्ता, दीपक मौर्य प्रदीप कंबोज शिवम केशव वर्मा और अनुष्ठान में विशेष रूप से अमेरिका से आई कनिका व आद्या को सराहते हुए योग गुरु ने कहा कि नई पीढ़ी में बढ़ती धार्मिक आस्था जिज्ञासा और अपने धर्म को जीने की लगन देश और इसकी संस्कृति के लिए सुसमाचार है। राकेश जैन और ऋतु जैन के यजमानत्व में संपन्न हुए रुद्राभिषेक में पुष्प जैन के बांसुरीवादन ने सभी का मन मोह लिया।







