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तराई इलाकों में गंगा का तांडव, कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात,सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न

बढ़ते जलस्तर से जनजीवन अस्त-व्यस्त, किसान और ग्रामीणों पर दोहरी मार

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Monday, August 3, 2026

फर्रुखाबाद। नरौरा बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण जनपद फर्रुखाबाद के तराई इलाकों में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। सोमवार को बढ़े जलस्तर का असर तटीय गांवों पर साफ देखने को मिला, जहां पानी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

कई गांव में घुसा पानी, स्कूल और सरकारी इमारतें प्रभावित

गंगा का बढ़ता पानी तटीय गांव सिनौली तक पहुंच गया है। गांव के परिषदीय विद्यालय परिसर में पानी भर जाने के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई है। प्रधानाध्यापक वंदना सिंह ने बताया कि बच्चों की शिक्षा में रुकावट न आए, इसके लिए गांव के ही दूसरे प्राथमिक विद्यालय में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।इसके अलावा, गांव का पंचायत सचिवालय और आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं। ग्रामीणों में इस बात की गहरी आशंका है कि यदि जलस्तर में यही वृद्धि जारी रही, तो बाढ़ का पानी जल्द ही उनके रिहायशी घरों में भी घुस जाएगा।

कई अन्य गांव भी चपेट में, आवागमन के लिए जुगाड़ गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर केवल सिनौली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी इसका प्रभाव दिखने लगा है कि महादेवपुर सीघनपुर, महादेवपुर, अलीगढ़ और सुखा नगला आदि गांवों की सीमाओं तक पानी पहुंच गया है। बूढ़ी गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण निचले इलाकों में भी पानी भर गया है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि कई ग्रामीण आवागमन के लिए पारंपरिक नावों की कमी के चलते बड़ी कढ़ाही को नाव के रूप में उपयोग करने को मजबूर हैं।

किसानों की आजीविका पर संकट, मजबूरी में काट रहे कच्ची फसलें

बाढ़ के पानी से फसलें डूबने की आशंका और तबाही को देखते हुए किसान अपने परिवारों के साथ खेतों में उतर आए हैं और अधपकी फसलें काटने में जुटे हैं। दिव्यांग किसान जयकिशन ने बताया कि उनके लगभग 25 बीघा खेत में खड़ी मक्के की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। कच्ची और अधपकी फसल काटने से उन्हें लाखों रुपये का भारी नुकसान हो रहा है। टिलियां सलेमपुर के निवासी अमर सिंह ने भी दर्द साझा करते हुए बताया कि उनकी मक्के की फसल भी डूबने की कगार पर है। फसल अभी पूरी तरह पकी नहीं है, लेकिन कुल बर्बादी से बचने के लिए इसे समय से पहले काटना उनकी मजबूरी बन गई है।

प्रशासन से मदद की गुहार

पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने साहूकारों और बैंकों से कर्ज लेकर मक्के की बोआई की थी। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि फसल की लागत निकलना भी नामुमकिन नजर आ रहा है। संकट की इस घड़ी में ग्रामीणों और किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री वितरण और फसल नुकसान के मुआवजे की पुरजोर गुहार लगाई है।

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