मुरादाबाद, डिलारी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत डिलारी कस्बे में लाखों की लागत से बना सामुदायिक शौचालय आज सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। शौचालय बनने के बाद से ही यहां न पानी की व्यवस्था है, न सफाई और न ही कोई देखरेख करने वाला। नतीजा ये है कि आम जनता को मजबूरी में खुले में शौच करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शौचालय का उद्घाटन धूमधाम से किया गया था। अधिकारियों ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि अब महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों को कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन हकीकत इसके उलट है। शौचालय के गेट पर ताला लटका रहता है। अंदर गंदगी और कचरे का अंबार लगा हुआ है। टंकियों में पानी नहीं आता, नल टूटे पड़े हैं और बिजली कनेक्शन भी नहीं है।

दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और सफाई कर्मी ध्यान नहीं दे रहे। रात के समय असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है क्योंकि उन्हें शौच के लिए दूर जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने स्वच्छता के लिए लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई लाभ नहीं मिला। अगर जल्द ही शौचालय को चालू नहीं किया गया तो लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मामले को गंभीर बताते हुए उच्च अधिकारियों से जांच कराकर शौचालय को तुरंत शुरू कराने की मांग की है।फिलहाल डिलारी का ये सामुदायिक शौचालय सरकारी योजनाओं की हकीकत और कागजों पर विकास की पोल खोल रहा है।





