भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी और उत्तर प्रदेश स्थित प्रयागराज में बतौर एडिशनल सीपी सेवाएं दे रहे IPS अजय पाल शर्मा पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान वायरल वीडियो पर अब सियासत तेज हो गई है.
वायरल वीडियो को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और ब्यूरोक्रेसी में कार्यरत अधिकारियों को अपने आचरण और भाषा का विशेष ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी खुद को ‘हीरो’ या ‘मार्शल’ की तरह पेश करने की कोशिश करते हैं, जो उचित नहीं है, और किसी भी चुने हुए जनप्रतिनिधि के प्रति इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल सही नहीं माना जा सकता.
BJP ने क्या कहा?
राजपूत ने इसे ‘कमिटेड ब्यूरोक्रेसी’ की प्रवृत्ति बताते हुए कहा कि भारत की व्यवस्था ‘नॉन-कमिटेड ब्यूरोक्रेसी’ पर आधारित है, जहां प्रशासन संविधान के अनुसार चलता है, न कि किसी एक सरकार के हिसाब से. उन्होंने अजय पाल शर्मा को भी संविधान के दायरे में रहकर कार्य करने की नसीहत दी और कहा कि संविधान के विरुद्ध किसी भी कार्रवाई या व्यवहार को उचित नहीं ठहराया जा सकता.
वहीं इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के नेता और प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि अजय पाल शर्मा ने कुछ गलत नहीं कहा, बल्कि गुंडों को हिदायत दी है और जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए. अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा गया कि उनके समर्थकों को पहले ही ‘सीधा’ कर दिया गया है और अब बंगाल की बारी है. टीएमसी पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि उनके लोग अधिकारियों को धमकी दे रहे हैं, जो लोकतांत्रिक तरीका नहीं है, और चेतावनी दी गई कि मतदान के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी.





