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सल्टौआ पीएचसी डॉक्टरों के लिए बना लूट का अड्डा, बाहर की दवा और पर्चा लिखने का खेल जारी

अस्पताल के अंदर स्वास्थ्य नहीं, दलाली का बोलबाला — प्रशासन और सीएमओ बेखबर? ब्यूरों प्रभारी विकास चौधरी दैनिक अयोध्या टाइम्स बस्ती बस्ती।(सल्टौआ) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की हालत बद से बदतर होती जा रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार यह स्वास्थ्य केंद्र अब बीमारों के इलाज का नहीं,

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Tuesday, July 15, 2025

अस्पताल के अंदर स्वास्थ्य नहीं, दलाली का बोलबाला — प्रशासन और सीएमओ बेखबर?

ब्यूरों प्रभारी विकास चौधरी दैनिक अयोध्या टाइम्स बस्ती

बस्ती।(सल्टौआ) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की हालत बद से बदतर होती जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह स्वास्थ्य केंद्र अब बीमारों के इलाज का नहीं, बल्कि कथित लूट-खसोट का अड्डा बनता जा रहा है। सरकारी अस्पताल होने के बावजूद यहां आने वाले मरीजों को सरकारी दवा ना देकर बाहर का पर्चा थमाया जा रहा है, जिससे गरीब व जरूरतमंदों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि डॉक्टरों द्वारा दवाओं की कमी का बहाना बनाकर लगातार मेडिकल स्टोर से दवाएं मंगाई जाती हैं। जबकि अस्पताल में पर्याप्त दवाएं और सुविधाएं मौजूद होनी चाहिए। इससे प्रतीत होता है कि डॉक्टर और मेडिकल दुकानों के बीच साठगांठ का खेल चल रहा है। भाजपा सरकार की योजनाएं सिर्फ मंच पर?
राज्य सरकार बार-बार हर व्यक्ति को बेहतर इलाज” जैसी बातें मंचों से करती है। लेकिन सल्टौआ पीएचसी की हालत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां पर न डॉक्टर समय से आते हैं, न सही इलाज होता है, न ही कोई निगरानी। मरीजों को अपनी मर्जी से निजी क्लीनिक रेफर करना भी एक आम बात हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार इस लापरवाही की शिकायत की है, लेकिन सीएमओ कार्यालय से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा लगता है कि या तो सीएमओ को इस भ्रष्टाचार की जानकारी नहीं है या फिर आंख मूंदकर अनदेखा किया जा रहा है। जनता सवाल पूछ रही — जवाब देगा कौन? क्या गरीबों के लिए बना यह अस्पताल अब सिर्फ डॉक्टरों की कमाई का जरिया बनकर रह गया है?क्या भाजपा सरकार की “स्वस्थ भारत” की योजनाएं सिर्फ चुनावी भाषण तक सीमित हैं?क्या बस्ती प्रशासन और सीएमओ को इन गतिविधियों की भनक नहीं है?क्या कोई कार्रवाई होगी या इस तरह की मनमानी यूं ही चलती रहेगी?सल्टौआ पीएचसी की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर यह मामला भी अन्य कई मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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