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राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस वैश्विक अंतरिक्ष प्रयासों में भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है: मंत्री

नई दिल्ली। विज्ञान, कविता, यथार्थवाद और भविष्य की संभावनाओं से युक्त अपने भाषण में, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि एक भारतीय 2040 में चंद्रमा की सतह से विकसित भारत 2047 की घोषणा करेगा और इससे पूरे ब्रह्मांड में यह संदेश जाएगा

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Thursday, September 4, 2025

नई दिल्ली। विज्ञान, कविता, यथार्थवाद और भविष्य की संभावनाओं से युक्त अपने भाषण में, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि एक भारतीय 2040 में चंद्रमा की सतह से विकसित भारत 2047 की घोषणा करेगा और इससे पूरे ब्रह्मांड में यह संदेश जाएगा कि भारत आ गया है।
यहाँ भारत मंडपम में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम, शुरू से ही, रॉकेट और उपग्रहों से कहीं आगे रहा है – यह लोगों को सशक्त बनाने, जीवन को बेहतर बनाने और एक बेहतर भविष्य को आकार देने के बारे में रहा है। उन्होंने हाल ही में संपन्न राष्ट्रीय मीट 2.0 का भी उल्लेख किया, जो 2015 में पहले मेगा यूजर मीट के एक दशक बाद आयोजित किया गया था।
जितेंद्र सिंह ने कहा, ष्राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस इस बात की याद दिलाता है कि अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धियाँ अपने आप में एक लक्ष्य नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण की ओर एक कदम हैंकृजहाँ विज्ञान, नवाचार और जन कल्याण मिलकर राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं।ष् उन्होंने गगनयान मिशन की तैयारी कर रहे चार अंतरिक्ष यात्रियों ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला, ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन और ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप की ओर इंगित करते हुए कहा कि इसरो ने भारत के लिए एक बहुमूल्य संपत्ति बनाई है।
2014 में नरेन्‍द्र मोदी द्वारा शासन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग का विस्तार करने के आह्वान को याद करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2015 ने अंतरिक्ष अनुप्रयोगों को प्रमुख विकास कार्यक्रमों में एकीकृत करने का दृष्टिकोण निर्धारित किया था। उन्होंने कहा, ष्दस साल बाद, सरकारी और निजी क्षेत्र, दोनों ने अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि की है।ष् उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे संस्करण से पहले उपयोगकर्ता विभागों के साथ लगभग 300 बातचीत हुई और 5,000 से अधिक पृष्ठों वाले लगभग 90 दस्तावेज तैयार किए गए, जो 15-वर्षीय कार्ययोजना की नींव रखते हैं। इस योजना में 100 से अधिक उपग्रहों, जिनमें से 70 प्रतिशत छोटे उपग्रह होंगे, के प्रक्षेपण की परिकल्पना की गई है, जिन्हें सरकारी प्रौद्योगिकी मिशनों और निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले परिचालन मिशनों के मिश्रण के माध्यम से लागू किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, यह कार्ययोजना 2040 और उसके आगे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का मार्गदर्शन करेगा, तथा खाद्य और जल सुरक्षा, आपदा लचीलापन, पर्यावरणीय स्थिरता और समावेशी विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर विकसित भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करेगा।

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