संवादाता / भरत अग्रवाल
सहारनपुर | हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके 72 साथी शहीदों की याद में नगर में दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन हुआ। चेहल्लुम के मौके पर नगर के अलग-अलग इमामबारगाहों में बाहर से उलेमा तशरीफ लाए हुए थे। जिनमें मुख्य रूप से मुंबई से आए हुए ग्रैंड अयातुल्लाह सैयद अली सिस्तानी साहब के वकील मौलाना सैयद अहमद अली आब्दी, मेरठ से आए हुए मौलाना शेर अली जैदी ने मजलिसों को खिताब किया।
शुक्रवार रात को इमामबारगाह दरबार हुसैन कोट में मजलिस का आयोजन किया गया। जिसे मेरठ से आए हुए मौलाना शेर अली ज़ेदी साहब ने ख़िताब किया। मजलिस के बाद अंजुमन हुसैनिया की जानिब से मशाल जुलूस को बरामद किया गया। देर रात क़सरे फातमी चौक पर मजलिस का आयोजन हुआ जिसमें नकाबत मौलाना जोन काज़मी ने की। इस दौरान 18 कमरे बनी हाशिम के लाशों की ज़ियारत कराई गई।
शनिवार अल सुबह 5:00 बजे दरगाह हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से जुलूस अमारी बरामद हुआ। यह जुलूस कुआँ चौक पर पहुंचा जहाँ पर मौलाना जौन काज़मी ने दर्दनाक मसाएब पढ़े। नमाज ए ज़ोहर के बाद इमामबारगाह दरबारे हुसैन कोट और इमामबारगाह छत्ता में मजलिसों का आयोजन हुआ। जिन्हें क्रमशः मौलाना शेर अली ज़ेदी और मौलाना अहमद अली आब्दी नें खिताब किया। मजलिस के बाद इमामबरगाह छत्ता से विशाल मातमी जुलूस बरामद हुआ।
जब ये जुलूस कसरे ज़ेहरा चौक पहुंचा तो मौलाना नें हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की दर्दनाक शहादत बयान की। कुआं चौक पर अंजुमन हुसैनिया के नौजवानों ने जंजीर ज़नी की। मुख्य बाजार से होते हुए यह जुलूस थाना चौक पर पहुंचा जहाँ पर पहले अंजुमन हैदरी फिर अंजुमन सरकार अबूतालिब के सैंकड़ो नौजवानों ने जंजीर से पुरसा पेश किया। देर रात यह जुलूस दादा मिराजी होते हुए दरगाह हज़रत इमाम हुसैन पर जाकर समाप्त हुआ।







