तीसरी बार तहसील अध्यक्ष चुने गए धर्मेन्द्र मिश्रा,पत्रकार हितों के संघर्ष का लिया संकल्प - सोनभद्र: होमगार्ड भर्ती परीक्षा की शुचिता को लेकर जिला प्रशासन सख्त, डीएम और एसपी ने किया केंद्रों का औचक निरीक्षण - सोनभद्र: होमगार्ड भर्ती परीक्षा के केंद्रों का डीएम ने किया औचक निरीक्षण, दिए कड़े निर्देश - सोनभद्र के 41वें जिलाधिकारी के रूप में श्री चर्चित गौड़ ने संभाला कार्यभार - प्री-पेड मीटर की मनमानी से त्रस्त सोनभद्र की जनता; बिना रीडिंग भेजे जा रहे बिजली बिलतीसरी बार तहसील अध्यक्ष चुने गए धर्मेन्द्र मिश्रा,पत्रकार हितों के संघर्ष का लिया संकल्प - सोनभद्र: होमगार्ड भर्ती परीक्षा की शुचिता को लेकर जिला प्रशासन सख्त, डीएम और एसपी ने किया केंद्रों का औचक निरीक्षण - सोनभद्र: होमगार्ड भर्ती परीक्षा के केंद्रों का डीएम ने किया औचक निरीक्षण, दिए कड़े निर्देश - सोनभद्र के 41वें जिलाधिकारी के रूप में श्री चर्चित गौड़ ने संभाला कार्यभार - प्री-पेड मीटर की मनमानी से त्रस्त सोनभद्र की जनता; बिना रीडिंग भेजे जा रहे बिजली बिल

शिवभक्ति में नारी शक्ति का संयोजन: कांवड़ यात्रा में उठाया आस्था का भार

सरसावा(अंजू प्रताप)। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा जहां पुरुषों की तीव्रता और जुनून के लिए प्रसिद्ध रही है, वहीं इस बार एक नया अध्याय जुड़ गया। नारी श्रद्धा और साहस का अद्भुत प्रदर्शन। हरिद्वार से गंगाजल लेकर चल रही इस महायात्रा में इस बार महिलाओं की भागीदारी

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Wednesday, July 23, 2025

सरसावा(अंजू प्रताप)। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा जहां पुरुषों की तीव्रता और जुनून के लिए प्रसिद्ध रही है, वहीं इस बार एक नया अध्याय जुड़ गया। नारी श्रद्धा और साहस का अद्भुत प्रदर्शन। हरिद्वार से गंगाजल लेकर चल रही इस महायात्रा में इस बार महिलाओं की भागीदारी न केवल बढ़ी, बल्कि उन्होंने भक्ति और संकल्प की वह मिसाल पेश की जो लंबे समय तक स्मरणीय रहेगी। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने इस बार भारी कांवड़ें उठाकर अपने सामर्थ्य और आस्था का एक नया परिचय दिया। कहीं 5 लीटर, कहीं 11 लीटर तो कहीं 21 लीटर जल की कांवड़ें लेकर महिलाएं सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पर निकल पड़ीं। इस दौरान सरसावा जैसे महत्वपूर्ण मार्गों से गुजरते हुए उन्होंने न सिर्फ शिवभक्ति की झलक दी। बल्कि समाज के सामने यह संदेश भी रखा कि अब कांवड़ यात्रा में महिलाओं की भागीदारी कोई अपवाद नहीं, बल्कि परंपरा बन रही है।

भोगपुर हरियाणा निवासी चाहत काम्बोज जो इस बार दूसरी बार 11 लीटर जल लेकर हरिद्वार से निकली हैं, ने बताया कि भगवान शिव की भक्ति में ही जीवन का परम आनंद है। उन्होंने कहा, “कांवड़ यात्रा सिर्फ पुरुषों की नहीं, यह तो हर उस आत्मा की यात्रा है जो शिव से जुड़ना चाहती है। इस बार रास्ते में कई जगह देखा कि महिलाएं बड़ी संख्या में परिवारों के साथ या सहेलियों के साथ कांवड़ लेकर चली हैं। यह बहुत सुखद अनुभव है।”

इसी प्रकार सोनीपत की रूबी चौधरी, पानीपत की काजल बाला, अंबाला की शीतल देवी, दिल्ली की मोनिका शर्मा और जयपुर की नीता कुमारी ने भी अलग-अलग रूटों से निकलकर इस बार शिवरात्रि तक गंगाजल चढ़ाने का संकल्प लिया। कहीं बेटियों ने अपने भाइयों के साथ कंधा मिलाया, तो कहीं मां-बेटी की जोड़ी शिवनाम का संकीर्तन करती हुई सड़कों पर आगे बढ़ती नजर आई।

आस्था की इस यात्रा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने न केवल धार्मिक दायरे को विस्तृत किया है, बल्कि समाज की मानसिकता को भी सकारात्मक दिशा में मोड़ा है। शिवभक्ति अब सीमाओं में नहीं बंधी। न उम्र की, न लिंग की, न जाति की। सड़कों पर कांवड़ लेकर बढ़ती हर महिला आज यह साबित कर रही है कि श्रद्धा और समर्पण किसी भौतिक शक्ति से नहीं, बल्कि अंतःकरण की गहराई से उपजता है।कांवड़ मार्ग पर महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के मद्देनज़र प्रशासन ने भी अतिरिक्त सावधानी बरती है। महिला स्वयंसेवियों की तैनाती, मेडिकल हेल्प डेस्क, रात्रि विश्राम स्थल और जलपान केंद्रों पर विशेष ध्यान रखा गया है। पुलिस भी संवेदनशील रूटों पर लगातार निगरानी बनाए हुए है, ताकि महिलाओं की यह यात्रा निर्भीक और निर्विघ्न पूरी हो सके। कुल मिलाकर, इस बार की कांवड़ यात्रा केवल भक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण और समरसता की यात्रा बन गई — और उसकी सबसे सशक्त छवि रही सड़कों पर नंगे पांव चलती, सिर पर गंगाजल की कांवड़ उठाए नारी शक्ति।

खबरें और भी

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले