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शिवभक्ति की अद्वितीय लहर: सरसावा क्षेत्र से हजारों कांवड़िए निकले हरिद्वार, गांव-गांव से उठी ‘बोल बम’ की गूंज

सरसावा(अंजू प्रताप) सावन मास की पवित्र शिवरात्रि के अवसर पर इस बार सरसावा क्षेत्र में आस्था की बाढ़ आ गई है। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाने वाले शिवभक्तों की संख्या में इस वर्ष जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। हर गांव से 50 से लेकर 100 से अधिक

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Tuesday, July 22, 2025

सरसावा(अंजू प्रताप) सावन मास की पवित्र शिवरात्रि के अवसर पर इस बार सरसावा क्षेत्र में आस्था की बाढ़ आ गई है। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाने वाले शिवभक्तों की संख्या में इस वर्ष जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। हर गांव से 50 से लेकर 100 से अधिक युवाओं ने कांवड़ यात्रा के लिए कूच किया है। कोई पैदल तो कोई ट्रैक्टर-ट्राली, बाइक व अन्य वाहनों से बाबा भोलेनाथ की सेवा में समर्पित होकर निकला है। क्षेत्र का हर कोना ‘बोल बम’ के जयकारों से गूंज रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बिनाखेड़ी से करीब 100 शिवभक्तों का दल हरिद्वार के लिए रवाना हुआ, वहीं छप्पर गांव से इस बार 100 से भी अधिक श्रद्धालु पवित्र जल लेने गए हैं। शेखपुरा गांव से 50, रायपुर से 100, और सापला से 50 से अधिक कांवड़िए तो वहीं कुतुबपुर से 50 से 55 और झरौली गांव से पवित्र जल लाने वाले शिवभक्तों की संख्या लगभग 48 रही। शिवनिष्ठा के साथ भक्त इस पुण्य यात्रा पर निकले हैं।

सभी कांवड़िये तयशुदा कार्यक्रम के तहत शिवरात्रि से एक दिन पहले यानी 22 जुलाई की शाम अपने-अपने गांव लौटकर जल को सुरक्षित स्थान पर स्थापित कर आज मुहूर्त में अपने-अपने शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे। युवाओं की टोली के साथ गांवों से महिला मंडल व बुजुर्ग भी सेवा भाव में सक्रिय हैं। कहीं नंगे पांव यात्रा हो रही है तो कहीं डीजे पर हर-हर महादेव के भजनों के साथ भक्तों का उत्साह आसमान छू रहा है। कुछ श्रद्धालु लगातार उपवास रखते हुए यह यात्रा कर रहे हैं तो कुछ झोले में बाबा की तस्वीर और गंगाजल रखकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। सरसा क्षेत्र में हर गांव इस समय शिवमय हो चुका है। युवाओं की ऊर्जा, महिलाओं का सेवा भाव और बुजुर्गों की प्रेरणा मिलकर इस वर्ष की कांवड़ यात्रा को एक आध्यात्मिक उत्सव में बदल चुकी है। हरिद्वार से लौट रहे ये हजारों कांवड़िए सिर्फ गंगाजल नहीं ला रहे। वे साथ ला रहे हैं एकता, भक्ति, सेवा और आस्था की वह परंपरा जो सदियों से भारत की पहचान रही है। शिवरात्रि पर जब गांव-गांव के शिवालयों में गंगाजल चढ़ेगा तो वह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं होगा। वह होगा एक क्षेत्र की सामूहिक श्रद्धा का पर्व।

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