सरसावा।। नगर के शुगर मिल परिसर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में सोमवार को आचार्य कुलदीप दीक्षित ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि जब राक्षस तारकासुर ने देवताओं पर आतंक फैलाया, तो उसका वध केवल शिव पुत्र द्वारा ही संभव था। इसके लिए भगवान शिव की तपस्या भंग कर, उनका माता पार्वती से विवाह कराया गया। कथा के दौरान आचार्य दीक्षित ने पिता-पुत्री के रिश्ते पर विशेष चर्चा करते हुए कहा कि जब किसी पिता की बेटी विदा होती है, तो वह भीतर से टूट जाता है, पर उसे व्यक्त नहीं करता। माँ के बाद यदि कोई स्त्री पुरुष का सबसे ज़्यादा ध्यान रखती है, तो वह उसकी बेटी होती है। उन्होंने कहा कि बेटियाँ भले जानती हैं कि उन्हें एक दिन ससुराल जाना है, फिर भी वे चार बेटों से अधिक अपने पिता से प्रेम करती हैं। उन्होंने वर्तमान समय में विवाह के बाद टूटते संबंधों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसका कारण संस्कारों की कमी है। इसलिए जरूरी है कि बेटियों को अच्छे संस्कार दें और रामायण जैसे ग्रंथों का अध्ययन करें, जो परिवार को जोड़कर चलना सिखाते हैं। कथा में उन्होंने सास-बहू के रिश्ते को भी छुआ और कहा कि बहू को अगर बेटी जैसा मान लिया जाए, तो वह भी सास-ससुर को माँ-बाप का दर्जा देती है। इससे परिवार में प्रेम और आदर की भावना बनी रहती है। कथा से पूर्व आचार्य राहुल कृष्णन ने विधिवत पूजन कराया। कार्यक्रम में यशपाल, दीपक, राजन, पूर्वी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।







