सरसावा(अंजू प्रताप)। शुगर मिल परिसर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के अंतर्गत प्रवचन करते हुए आचार्य कुलदीप दीक्षित जी महाराज ने बेल पत्र की दिव्यता और धार्मिक महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक शुद्ध बेल पत्र शिवलिंग पर चढ़ाने मात्र से मनुष्य के तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। आचार्य जी ने शास्त्रों का संदर्भ देते हुए श्लोक का उच्चारण किया “त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनॆत्रं च त्रियायुधं, त्रिजन्म पापसंहारम् बिल्वंपत्रं शिवार्पणम्। उन्होंने बताया कि यह श्लोक प्रमाणित करता है कि बिल्व पत्र शिव को अत्यंत प्रिय है और यह त्रिगुणात्मक स्वरूप के प्रतीक के रूप में उन्हें अर्पित किया जाता है। कथा में एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए आचार्य जी ने बताया कि एक चोर शिवरात्रि की रात्रि में बेल के पेड़ पर बैठा हुआ था और राह देख रहा था। वहीं पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थापित था। चोर अनजाने में बेल पत्र तोड़कर नीचे गिराता रहा, जो सीधे शिवलिंग पर गिरते रहे। इस अनजानी पूजा से भगवान शिव इतने प्रसन्न हुए कि चोर को साक्षात दर्शन दे दिए और मोक्ष का वरदान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि चाहे जानबूझकर हो या अनजाने में, यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से शिव की उपासना करता है या कोई पुण्य कर्म करता है, तो उसका प्रभाव निश्चित रूप से मिलता है। इसीलिए हर भक्त को शिवलिंग पर निर्मल, कोमल और अखंडित बेल पत्र अवश्य अर्पित करना चाहिए। कथा से पूर्व पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ, जिसे आचार्य राहुल कृष्णन जी ने विधिवत संपन्न कराया। इस अवसर पर यजमान के रूप में प्रशांत, रविंद्र, मुकेश, इंद्र सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की उपस्थिति और श्रद्धा से कथा स्थल शिवमय वातावरण में परिवर्तित हो गया।







