फर्रुखाबाद।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फर्रुखाबाद दौरे ने जहाँ एक तरफ बाढ़ पीड़ितों को राहत और किसानों-युवाओं को बड़े विकास कार्यों का संबल दिया, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। मुख्यमंत्री के आगमन की भनक लगते ही वर्षों से लंबित पड़े विकास कार्य और विभागीय फाइलें महज 24 घंटे के भीतर दौड़ पड़ीं, जिससे आम जनता के मन में यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सिस्टम सिर्फ वीआईपी दौरों के भरोसे ही चलता है?

रातों-रात चमकी सड़कें और दुरुस्त हुए फीडर
पुलिस लाइन फतेहगढ़ के आसपास की जो सड़कें वर्षों से बदहाल थीं और जिन पर चलना दूभर था, मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना मिलते ही उन पर रातों-रात बजट भी आ गया और सड़क निर्माण की प्रक्रिया पूरी करके उन्हें चकाचक भी कर दिया गया। ऐसा ही हाल बिजली विभाग का रहा। नवाबगंज के अठसेनी फीडर से जुड़े किसान लंबे समय से जर्जर व्यवस्था और खराब उपकरणों को बदलने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन विभाग के कान पर ज्यूं तक नहीं रेंगी। जैसे ही सीएम के दौरे का कार्यक्रम तय हुआ, डरे हुए बिजली विभाग के कर्मचारियों ने किसानों की सुनवाई करते हुए उन पुराने फीडरों और उपकरणों को रातों-रात बदल डाला।

जनता का तीखा सवाल, क्या आम आदमी की समस्याओं का कोई मोल नहीं?
इस त्वरित कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों और किसानों ने तीखा रोष व्यक्त किया है। उनका सीधा सवाल है कि क्या किसी उच्च पदाधिकारी या मुख्यमंत्री के आगमन पर ही सभी विभागों की नींद खुलती है? क्या बिना किसी वीआईपी दौरे के जिला प्रशासन और विभिन्न विभाग जनता के सामान्य कार्यों को करने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं? सालों तक फाइलों में अटके रहने वाले काम यदि 24 घंटे में हो सकते हैं, तो आम दिनों में जनता को महीनों और वर्षों तक क्यों दौड़ाया जाता है?
मुख्यमंत्री का मुख्य दौरा और घोषणाएं
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस लाइन फतेहगढ़ में आयोजित भव्य कार्यक्रम में सदर, कायमगंज और अमृतपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद 1,000 परिवारों को राहत सामग्री चना, गेहूं, तेल आदि से युक्त 26 प्रकार की किट और बेघर हुए लोगों को आवासीय पट्टे व आर्थिक सहायता बांटी। संबोधन के दौरान सीएम योगी ने विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के नाम पर चलने वाली लूट और ‘सैफई सिंडिकेट’ की व्यवस्था पर सरकार ने ताला लगा दिया है। किसानों के लिए गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 400 रुपए प्रति क्विंटल करने, कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू का प्रति बोरी पैसा देने, और पेरू के सहयोग से आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र बनवाने का ऐलान किया। साथ ही, स्नातक की 50 हजार छात्राओं को ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ के तहत स्कूटी देने और युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार देने की बात दोहराई। एक तरफ जहां सरकार विकास और जनता के कल्याण के बड़े दावे कर रही है, वहीं फर्रुखाबाद में वीआईपी दौरे के नाम पर रातों-रात हुए कामों ने प्रशासनिक अमले की कार्यसंस्कृति पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।





