ब्यूरो चीफ सोनभद्र। जनपद के निजी स्कूलों द्वारा किताबों के नाम पर की जा रही अंधाधुंध वसूली और शिक्षा विभाग की कथित संदेहास्पद चुप्पी के खिलाफ आरटीआई एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अमान खान ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया है। जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध न कराए जाने से क्षुब्ध होकर उन्होंने आयोग के समक्ष ऑनलाइन द्वितीय अपील (पंजीकरण संख्या: A-20260701570) दाखिल कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
आरटीआई एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अमान खान ने 4 अप्रैल 2026 को ऑनलाइन आरटीआई दाखिल कर बेसिक शिक्षा विभाग से निजी स्कूलों में चल रहे खेल को लेकर 5 बिंदुओं पर महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं:
- नियमों की प्रति: निजी स्कूलों द्वारा किताबों के मूल्य निर्धारण और बिक्री को लेकर शासन द्वारा जारी वर्तमान नियमावली की प्रमाणित प्रति।
- जयपुरिया स्कूल पर सवाल: क्या विभाग के संज्ञान में है कि रॉबर्ट्सगंज स्थित जयपुरिया स्कूल (या अन्य) में कक्षा 2 की किताबों के लिए लगभग ₹7000 वसूले जा रहे हैं? क्या इस मूल्य को विभाग ने मंजूरी दी है?
- मूल्य सूची का ब्यौरा: उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अधिनियम के तहत क्या उक्त स्कूलों ने इस सत्र की मूल्य सूची विभाग में जमा की है?
- विशेष दुकान से खरीद की बाध्यता: क्या निजी स्कूलों को किसी विशेष दुकान या परिसर से ही किताबें बेचने की अनुमति है? यदि नहीं, तो इस पर रोक संबंधी आदेश की प्रति।
- कार्रवाई का प्रावधान: मानकों से अधिक मूल्य वसूलने वाले स्कूलों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की क्या प्रक्रिया है?
अधिकारियों की लापरवाही और सूचना दबाने का आरोप
आवेदन दाखिल होने के बाद 7 अप्रैल 2026 को तत्कालीन जन सूचना अधिकारी/अपर जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक) रमेश चंद्र ने इस आवेदन को धारा 6(3) के तहत बेसिक शिक्षा अधिकारी, सोनभद्र को अंतरित कर दिया था। इसके बावजूद, निर्धारित 30 दिनों में कोई जानकारी नहीं दी गई।
इसके बाद आवेदक ने 26 मई 2026 को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी/जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह के समक्ष प्रथम अपील दर्ज कराई। अत्यंत खेद का विषय रहा कि 30 मई 2026 को आदेश की तिथि बीतने के बाद भी जिलाधिकारी कार्यालय से कोई प्रभावी राहत नहीं मिली और न ही मांगी गई पूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराई गईं।
द्वितीय अपील में की गई दंडात्मक कार्रवाई की मांग
अमान खान ने अपनी अपील में आरोप लगाया है कि निजी स्कूलों से जुड़े इस बेहद संवेदनशील और जनहित के मुद्दे पर विभाग जानबूझकर संरक्षणात्मक रवैया अपना रहा है और सूचनाओं को दबाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने राज्य सूचना आयोग से मांग की है कि:
- प्रतिवादी जन सूचना अधिकारी को निर्देशित कर समस्त सूचनाएं तत्काल निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
- सूचना अधिकार अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन करने, जानबूझकर देरी करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विधिक व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आयोग ने अपील को पंजीकृत करते हुए मामले की ऑनलाइन सुनवाई का विकल्प स्वीकार किया है, जिससे अब संबंधित विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।





