मिर्ज़ापुर ब्यूरो। जनपद में मानवाधिकारों के संरक्षण के नाम पर कतिपय निजी संगठनों द्वारा संचालित की जा रही अवैध समानांतर व्यवस्थाओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की गंभीर प्रवृत्तियों के विरुद्ध चल रही मुहिम में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ आया है। राइट टू इंफॉर्मेशन (RTI) एसोसिएशन, मिर्ज़ापुर के जिला उपाध्यक्ष नितेश उपाध्याय द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के समक्ष दायर की गई सूचना का अधिकार अर्जी पर आयोग ने बिंदुवार और सुस्पष्ट आधिकारिक प्रत्युत्तर प्रेषित किया है। आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना से यह पूर्णतः प्रतिपादित हो चुका है कि इस संवेदनशील प्रकरण में उच्चस्तरीय हस्तक्षेप करते हुए जनपद के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को त्वरित एवं दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
क्या था सूचना का अधिकार (RTI) के अंतर्गत उठाया गया मुख्य प्रश्न?
प्राप्त विवरण के अनुसार, RTI एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष नितेश उपाध्याय ने विगत 27 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष एक ऑनलाइन आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया था। इस आवेदन के माध्यम से उन्होंने ‘समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन’ नामक एक निजी संस्था की विधिक प्रामाणिकता, उसके पंजीकरण की वैधता, तथा उक्त संस्था द्वारा ‘TIR’ (टॉर्चर इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट – Torture Information Report) के नाम से संचालित की जा रही अवैध एवं असंवैधानिक समानांतर व्यवस्था के संदर्भ में पांच अत्यंत तीखे और बिंदुवार प्रश्न पूछे थे।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि यह निजी संस्था स्वयं को मानवाधिकार आयोग का वास्तविक प्रतिनिधि एवं लोकसेवक के रूप में प्रदर्शित कर सर्वसाधारण में भ्रम व्याप्त कर रही है, अवैध धन उगाही (उगाही) में संलिप्त है, तथा शासकीय अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाकर उन्हें भयभीत करने का कुत्सित प्रयास कर रही है।
मानवाधिकार आयोग के आधिकारिक उत्तर में हुआ संपुष्टि का बड़ा खुलासा
नितेश उपाध्याय की आरटीआई के प्रत्युत्तर में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सहायक निबंधक (विधि) गौतम कुमार द्वारा निर्गत किए गए आधिकारिक पत्र (संदर्भ संख्या: NHRCM/R/E/26/00604) के अनुसार, इस गंभीर विषय को आयोग ने पूर्व में ही डायरी संख्या: 9220/IN/2026 तथा वाद संख्या: 5125/24/55/2026 के रूप में अंगीकार कर पंजीकृत कर लिया था।
आयोग ने आरटीआई के उत्तर में विधिक स्थिति स्पष्ट करते हुए सूचित किया है कि इस मूल शिकायत का निस्तारण कतिपय विशिष्ट एवं कड़े निर्देशों (Disposed with Directions) के साथ २० मई २०२६ को ही निष्पादित किया जा चुका है। आयोग ने इस विषय को पूर्ण विधिक वैधानिकता के साथ अग्रिम दंडात्मक एवं सुधारात्मक कार्रवाई हेतु जनपद के सक्षम प्राधिकारियों को प्रेषित किया है:
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), मिर्ज़ापुर (कार्यालय: रमईपट्टी, मिर्ज़ापुर सदर)
- जिला मजिस्ट्रेट / जिलाधिकारी (DM), मिर्ज़ापुर
चार सप्ताह की कठोर समय-सीमा के भीतर मांगी गई ‘कार्रवाई आख्या’
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने पूर्व आदेश का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया है कि उक्त परिवाद को विधि के प्रावधानों के अनुरूप उचित वैधानिक अन्वेषण एवं दंडात्मक कार्रवाई हेतु स्थानीय प्रशासन (DM एवं SSP मिर्ज़ापुर) को हस्तांतरित किया गया है। आयोग ने इन शीर्ष अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस जांच प्रक्रिया में शिकायतकर्ता/पीड़ित (नितेश उपाध्याय) को प्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित करें, संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच (Enquiry) सुनिश्चित करें, की गई दंडात्मक कार्रवाई से शिकायतकर्ता को अवगत कराएं, तथा इस समस्त विधिक प्रक्रिया की विस्तृत कार्रवाई आख्या (Action Taken Report) अनिवार्य रूप से चार सप्ताह की अवधि के भीतर आयोग के पटल पर प्रस्तुत करें।
सूचना के अधिकार के माध्यम से हुए इस प्रामाणिक खुलासे के पश्चात अब मिर्ज़ापुर के जिला एवं पुलिस प्रशासन पर उक्त अवैध निजी संस्था के विरुद्ध त्वरित एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने का विधिक दबाव अत्यधिक बढ़ गया है। आरटीआई एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष नितेश उपाध्याय ने इस विधिक प्रत्युत्तर पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि, “आयोग का यह उत्तर मानवाधिकारों के नाम पर दुकानदारी चलाने वाले तत्वों के विरुद्ध और प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने की दिशा में एक युगांतकारी विजय है।”






