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सोनभद्र: नई बाज़ार स्थित गैलेक्सी फिलिंग स्टेशन बना 'घोटाले का अड्डा', जनता को 50 रुपये की 'भीख' और चहेतों को 'छप्पर फाड़' पेट्रोल! ● सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाकर प्लास्टिक बोतलों में भरा जा रहा है मौत का ईंधन ● घटतौली और अभद्रता से उपभोक्ता त्रस्त, जिलाधिकारी

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Wednesday, April 15, 2026

राबर्ट्सगंज/सोनभद्र (अमान खान ब्यूरो चीफ)। जनपद के नई बाज़ार स्थित इंडियन ऑयल के गैलेक्सी फिलिंग स्टेशन पर इन दिनों ‘अंधेर नगरी-चौपट राजा’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। यहाँ पेट्रोल के नाम पर आम जनता के साथ न केवल आर्थिक धोखाधड़ी की जा रही है, बल्कि उनके स्वाभिमान को भी ठेस पहुँचाई जा रही है।

आम जनता के लिए ‘राशनिंग’, चहेतों के लिए ‘मौज’
हैरानी की बात यह है कि फिलिंग स्टेशन संचालक ने अपनी स्वघोषित ‘राशनिंग’ प्रणाली लागू कर दी है। कतार में लगे आम नागरिकों को मात्र 50 रुपये का पेट्रोल देकर टरकाया जा रहा है, जबकि संचालक के करीबियों और रसूखदारों को डिमांड के अनुसार पूरा ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। जब उपभोक्ता इस भेदभाव का विरोध करते हैं, तो पंप पर तैनात कर्मचारी उनसे गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करने पर उतारू हो जाते हैं।

सुरक्षा को ठेंगा: बोतलों में मौत का खेल
पेट्रोलियम नियमों की मानें तो प्लास्टिक की बोतलों में पेट्रोल देना संगीन अपराध है, लेकिन गैलेक्सी फिलिंग स्टेशन पर नियम कागजों तक सीमित हैं। यहाँ धड़ल्ले से प्लास्टिक की बोतलों में पेट्रोल भरा जा रहा है, जो किसी भी समय बड़े अग्निकांड को दावत दे सकता है। सूत्रों की मानें तो यहाँ मशीनों में घटतौली (Short Delivery) का खेल भी बड़े पैमाने पर चल रहा है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा डाका डाला जा रहा है।

प्रशासनिक चुप्पी पर उठ रहे सवाल
क्षेत्रीय जनता ने अब इस ‘पेट्रोल माफिया’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) और जिलाधिकारी से लेकर पूर्ति विभाग तक सामूहिक शिकायत भेजकर इस पंप को तत्काल सीज (Seize) करने की मांग की गई है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस फिलिंग स्टेशन का लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

इनसेट: क्या कहते हैं नियम?

“पेट्रोलियम अधिनियम 1934 के अनुसार, बिना लाइसेंस या असुरक्षित पात्रों (जैसे प्लास्टिक बोतल) में ज्वलनशील पदार्थों का विक्रय करना दंडनीय अपराध है। साथ ही, उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तु (पेट्रोल) देने से मना करना या भेदभाव करना सीधे तौर पर लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन है।”

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