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जब धर्म की हानि और ग्लानि होती है, तब भगवान का अवतार होता है: मनीष शरण जी महाराज

गायत्री भवन में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन उमड़े श्रद्धालु, 'हानि' और 'ग्लानि' के भेद को महाराज जी ने समझाया

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Friday, February 6, 2026

सोनभद्र,अमान खान ब्यूरो चीफ (राबर्ट्सगंज)। नगर के तेजनगर उरमौरा स्थित गायत्री भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वृहस्पतिवार को अयोध्या धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक मनीष शरण जी महाराज ने भगवान के अवतार और धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए भक्तों को भावविभोर कर दिया।

​महाराज जी ने कथा के दौरान ‘धर्म की हानि’ और ‘धर्म की ग्लानि’ के बीच के सूक्ष्म अंतर को बहुत ही सरल उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा:

​”यदि कोई बच्चा बाजार जाकर पैसे खो दे, तो वह हानि है। लेकिन यदि वही बच्चा उन पैसों से शराब पीकर आए, तो वह माता-पिता के लिए ग्लानि है। भगवान इन दोनों ही परिस्थितियों में असुरों के विनाश और भक्तों के उद्धार के लिए धरती पर अवतरित होते हैं।”

​कथा के मुख्य अंश:

  • ​अवतार का कारण: महाराज जी ने रामचरितमानस की चौपाई “जब जब होहिं धरम कै हानी, बाढ़इ असुर अधम अभिमानी” और गीता के श्लोक “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवती भारत…” के माध्यम से बताया कि अधर्म के बढ़ने पर प्रभु विविध स्वरूप धारण करते हैं।
  • ​लोक कल्याण: उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण, गाय, देवता और संतों के मंगल के लिए ही भगवान मनुष्य रूप में अवतार लेकर धर्म की मर्यादा स्थापित करते हैं।
  • ​भक्ति का माहौल: कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।

​उपस्थिति:

कथा के मुख्य यजमान वरिष्ठ अधिवक्ता पवन मिश्र ने पत्नी सहित सपरिवार विधि-विधान से पूजन कर कथा श्रवण किया। इस आध्यात्मिक अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री अम्बरीष जी, नीरज सिंह, विनोद चौबे, पद्माकर द्विवेदी, करुणाकर द्विवेदी, दीनानाथ पांडे सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

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