दैनिक अयोध्या टाइम्स ब्यूरो
पीलीभीत। बरेली और पीलीभीत की सीमा पर स्थित लबेड़ा टोल प्लाजा अब सफर करने वालों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि दहशत का पर्याय बन चुका है। नियम कानून को जूते की नोक पर रखने वाले टोल कर्मियों ने अब किसान नेताओं और आम जनता को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। आए दिन होने वाली बदसलूकी और अभद्रता ने यह साफ कर दिया है कि यहाँ प्रबंधन का नहीं, बल्कि जंगलराज का सिक्का चलता है।
ताजा मामला भारतीय किसान यूनियन भानू के पूरनपुर तहसील अध्यक्ष रुसान अहमद के साथ घटा है। रुसान अहमद अपने निजी कार्य से बरेली कॉलेज गए थे। वापसी के दौरान जब वे लबेड़ा टोल प्लाजा पहुंचे, तो वहां तैनात कर्मियों ने उनके साथ बेहद अपमानजनक व्यवहार किया। सूत्रों के मुताबिक इस टोल प्लाजा पर बाकायदा पेशेवर बाउंसर तैनात किए गए हैं, जिनका काम यात्रियों की मदद करना नहीं बल्कि उन्हें डराना धमकाना है। रुसान अहमद का आरोप है कि टोल कर्मी और वहां खड़े निजी बाउंसर बात बात पर मारपीट उतारू हो जाते हैं।
दैनिक यात्रियों का तो यहाँ तक कहना है कि लबेड़ा टोल पार करना किसी युद्ध जीतने जैसा है, जहाँ हर वक्त गाली गलौज और धमकियों का सामना करना पड़ता है। यह पहली बार नहीं है जब लबेड़ा टोल प्लाजा विवादों के घेरे में आया हो। पूर्व में भी कई बार आम यात्रियों और स्थानीय लोगों के साथ मारपीट की खबरें सुर्खियां बन चुकी हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर इन टोल कर्मियों को किसका संरक्षण प्राप्त है? क्या प्रशासन ने इन्हें जनता के साथ दुर्व्यवहार करने का लाइसेंस दे रखा है? सुरक्षा के नाम पर रखे गए ये बाउंसर वास्तव में वसूली एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। इस घटना से किसान संगठनों में उबाल है।
तहसील अध्यक्ष रुसान अहमद ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि इस बदसलूकी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है। किसान नेताओं ने हुंकार भरी है कि यदि प्रशासन ने इन सड़क छाप गुंडों पर लगाम नहीं कसी, तो टोल प्लाजा पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन प्रशासन की होगी। रुसान अहमद का कहना है कि टोल प्लाजा लूट और गुंडागर्दी का अड्डा बन चुका हैं। अगर इन गुंडों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान सड़कों पर उतरकर इन्हें सबक सिखाना जानते हैं।







