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देश को बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 6 करोड़ से अधिक नागरिकों तक यह संदेश पहुंचाया गया

पोर्टलों पर बाल विवाह के विरुद्ध 28 लाख से अधिक संकल्प दर्ज की गईं

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Wednesday, February 4, 2026

With the aim of making the country child marriage free, this message was conveyed to more than 6 crore citizens through 'Child Marriage Free India' awareness programmes.

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 27 नवंबर 2024 को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ नामक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की थी जिसका मुख्य उद्देश्य देश को बाल विवाह से पूरी तरह मुक्त बनाना है। इस पहल के तहत ‘समग्र सरकारी’ और ‘समग्र सामाजिक’ दृष्टिकोण अपनाते हुए ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके लिए लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण माना गया है।

इस अभियान का मुख्य लक्ष्य बाल विवाह रोकने के लिए व्यापक जागरूकता फैलाना, माता-पिता, परिवार और समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना, बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ) की क्षमता और भूमिका को प्रभावी बनाना, बाल विवाह से जुड़े मामलों की समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना, साथ ही उन किशोरियों की पहचान करना है जो स्कूल छोड़ चुकी हैं या जिन पर बाल विवाह का खतरा मंडरा रहा है। इसके माध्यम से उनकी शिक्षा, कौशल विकास और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत 4 दिसंबर 2025 को 100 दिनों का विशेष अभियान प्रारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य इस पहल की सफलता का उत्सव मनाने और इसे और अधिक प्रभावी बनाना है। इस अभियान का मुख्य मकसद सभी संबंधित पक्षों को एक योजनाबद्ध और निर्धारित समय सीमा के तहत जोड़ना है। इसके साथ ही, यह अभियान संस्थानों, सामुदायिक नेताओं और सेवा प्रदाताओं तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है।

साथ ही, इसमें बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ) की जानकारी को अनिवार्य रूप से बीवीएमबी पोर्टल पर अपलोड करने पर भी जोर दिया गया है। यह अभियान एक व्यवस्थित और चरणबद्ध कार्यान्वयन योजना के तहत संचालित है। पहले चरण में (27 नवंबर , 2025 से 31 दिसंबर, 2025) विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिताओं और शपथ समारोहों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

दूसरे चरण (1 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026) का मुख्य उद्देश्य धार्मिक संस्थानों और विवाह संबंधित सेवा प्रदाताओं, जैसे मंदिर, मस्जिद, खानपान सेवाएं, टेंट हाउस और डीजे इत्यादि के साथ सहयोग स्थापित करना है, ताकि बाल विवाह को रोकने के लिए जागरूकता फैलाई जा सके और सूचनात्मक एवं शैक्षिक सामग्री प्रदर्शित की जा सके। तीसरे चरण (1 फरवरी 2026 से 8 मार्च 2026) में ग्राम पंचायतों और नगर पालिका वार्डों को संगठित करते हुए ऐसे क्षेत्र को बाल विवाह मुक्त घोषित करने के लिए प्रस्ताव पारित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल (https://stopchildmarriage.wcd.gov.in) एक विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो बाल विवाह की जानकारी, सूचना के प्रसार और प्रतिज्ञाओं के पंजीकरण की सुविधा प्रदान करता है। इस पोर्टल और MyGov प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिक, संगठन और जनप्रतिनिधि बाल विवाह मुक्त भारत की शपथ ले सकते हैं, जिससे सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहन मिलता है। अब तक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 6 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई जा चुकी है और पोर्टल पर बाल विवाह रोकने के लिए 28 लाख से अधिक प्रतिज्ञाएं दर्ज की जा चुकी हैं। यह तथ्य देशभर में सामूहिक सहयोग और सक्रिय भागीदारी को मजबूत रूप से प्रदर्शित करता है।

यह अभियान बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ), पुलिस अधिकारियों, बाल संरक्षण समितियों, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और अन्य कर्तव्यनिष्ठ कर्मियों की क्षमता बढ़ाकर ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (पीसीएमए)’ के प्रवर्तन को सशक्त बनाता है ताकि शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। बीवीएमबी पोर्टल एक केंद्रीकृत मंच है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े 60,700 से अधिक सीएमपीओ का डाटाबेस शामिल है। यह नागरिकों को एक प्रभावी रिपोर्टिंग प्रणाली प्रदान करता है जिससे समय पर शिकायत दर्ज कर कड़ी कार्रवाई कर बाल विवाह को रोका जा सकता है।

केंद्र सरकार जागरूकता अभियान, मीडिया अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रम भी चलाती है और समय-समय पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बाल विवाह के दुष्परिणामों को उजागर करने के लिए सलाह जारी करती है। मिशन शक्ति के अंतर्गत, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) कार्यक्रम संचालित करता है, जिसका उद्देश्य लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और बाल विवाह को रोकना है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) जागरूकता कार्यक्रमों और विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद आयोजित करता है। इसी तरह, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) अपने राज्य और जिला निकायों के जरिये बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता पैदा करता है। साथ ही, इसके प्रभावी रोकथाम के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी करता है और हेल्पलाइन 15100 के जरिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करता है।

इसके साथ ही, भारत सरकार ने संकट में घिरे बच्चों की मदद के लिए एक टोल-फ्री, 24x7x365 आपातकालीन फोन सेवा चाइल्ड हेल्पलाइन (कोड 1098) शुरू की है। यह सेवा पुलिस, बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ), जिला बाल संरक्षण इकाइयों आदि के साथ मिलकर काम करती है और जरूरतमंद बच्चों को हर संभव सहायता प्रदान करती है, जिसमें बाल विवाह रोकने जैसे पहल भी शामिल हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) के साथ एकीकृत किया गया है, ताकि चौबीसों घंटे आपातकालीन सहायता, संसाधन और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, ईआरएसएस से एकीकृत महिला हेल्पलाइन (181) भी चौबीसों घंटे आपातकालीन और सामान्य परिस्थितियों में सहायता प्रदान करने के लिए उपलब्ध है।

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