राजकुमार पाठक
बांदा/ जिले की तहसीलों में भर्रा शाही और मनमानी के सिलसिले का शोर थमने का नाम नही ले रहा है कि बीते दिवस सदर तहसील में मची ” गदर ” का एक नमूना तब प्रकाश में आया जब तहसील स्थित हॉल में एस आई आर की समीक्षा बैठक के दौरान नजारा कुछ ऐसे बदला कि दो लेखपालों को तबादले के दंड भोगने की खबर सुर्खियां बन गई। हालातो को लेकर कल से लगातार तरह तरह की चर्चाओ का बाजार गरमा गया।
दिन शुक्रवार, स्थान तहसील का हॉल और हॉल में हो रही एस आई आर की समीक्षा बैठक, समय दोपहर बाद, जहां पर लगभग एक सैकड़ा के आस पास एस आई आर के लिए काम करने वाले सुपरवाइजर/ लेखपाल/बी एल ओ मौजूद थे, माहौल समीक्षा बैठक के दौरान किसी स्कूल के छात्रों के क्लास रूम जैसा नजर आ रहा था, वह ऐसे कि ” तहसील के बड़े साहब ” ने कुछ जानकारियों के लिए सुपरवाइजरों को खड़ा कराया और वह साहब के आदेश पर खड़े भी हुए और जो जानकारी थी वह बताया और फिर लगभग आधा घंटे तक खड़े रहे लेकिन उन्हे बैठने के लिए नहीं कहा गया तो,खड़े सुपरवाइजर अपनी अपनी कुर्सियों में बैठ गए, फिर क्या था समीक्षा बैठक ले रहे, तहसील के बड़े साहब समीक्षा अधिकारी के मन में पता नही क्या आया..? कि थोड़े समय बाद ही दो लेखपालों के तबादले की खबर प्रकाश में आई।
सूत्रों की माने तो उनका नाम दीपक और राकेश बताया जाता है। अब ऐसा क्या हुआ कि समीक्षा बैठक के तुरंत बाद दो लेखपालों को तबादला किया गया है, इसकी जानकारी काफी प्रयास करने के बाद नही मिल पाई लेकिन जो चर्चाओ का बाजार गर्म है उसकी में तो तहसील कर्मियों की दबी जुबाने कहती हैं कि तहसील के बड़े साहब इस लिए खफा हो गए, कि खड़ा करने के बाद, बिना आदेश के बैठने की जुर्रत की। सही और झूठ क्या है यह अंदर खाने की बात जैसी बनी है लेकिन तहसील के अंदर और बाहर परिसर में जो समीक्षा बैठक के दौरान को लेकर चर्चाओ का बाजार गर्म है उसकी माने तो लेखपालों के अंदर खाने तबादले को लेकर गुस्सा है और जितने मुंह उतनी बातें सुनाई पड़ती है।







