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सोनभद्र: पत्रकारिता की आड़ में ₹50 लाख की ‘वसूली’ और मानहानि का आरोप, IGRS पर गंभीर शिकायत दर्ज

फेसबुक और सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक टिप्पणियों और 'नोटिस' के जरिए धमकाने का मामला आया सामने; STF जांच की मांग

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Tuesday, January 20, 2026

सोनभद्र। जनपद में पत्रकारिता की शुचिता को कलंकित करने वाला एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। ग्राम तकिया निवासी इरशाद अहमद ने उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर सुकृत क्षेत्र के लोहरा निवासी शशिकांत मौर्य के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए गंभीर आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि खुद को पत्रकार बताने वाला आरोपी सोशल मीडिया के जरिए न केवल सांप्रदायिक नफरत फैला रहा है, बल्कि भारी भरकम रकम की मांग कर रहा है।

सांप्रदायिक टिप्पणियों से मानहानि का आरोप:

शिकायत के अनुसार, आरोपी शशिकांत मौर्य फेसबुक और ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) जैसे सार्वजनिक मंचों पर शिकायतकर्ता और उनके परिवार के विरुद्ध “आतंकवादी”, “पशु तस्कर” और “हलाला की औलाद” जैसे अत्यंत आपत्तिजनक और सांप्रदायिक शब्दों का प्रयोग कर रहा है। आरोप है कि इन कृत्यों से परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुँचा है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

50 लाख की मांग और ‘नोटिस’ का खेल:

मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी के अधिवक्ता के माध्यम से शिकायतकर्ता को एक कानूनी नोटिस भेजा गया। नोटिस में कथित तौर पर दावा किया गया कि शशिकांत को पिछले छह महीनों में 50 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए या तो माफी मांगी जाए या उक्त राशि दी जाए। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से सवाल किया है कि बिना किसी वैध मीडिया संस्थान या बड़े व्यवसाय के, एक कथित पत्रकार को इतनी बड़ी धनराशि का नुकसान कैसे हो सकता है? यह सीधे तौर पर वसूली की साजिश प्रतीत होती है।

उच्च स्तरीय जांच और सुरक्षा की गुहार:

इरशाद अहमद ने आरोपी के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए शासन से मांग की है कि मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या एसटीएफ (STF) से कराई जाए। साथ ही, आरोपी के आय के स्रोतों और उसकी पत्रकारिता की वैधता की भी जांच सुनिश्चित की जाए। पूर्व में दर्ज शिकायत संख्या 40020025008581 का उल्लेख करते हुए पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और पुलिस से सुरक्षा की मांग की है ताकि पत्रकारिता के चोगे में छिपे ‘ब्लैकमेलरों’ पर नकेल कसी जा सके।

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