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राम जाने..! कब कैसे कौन रोकेगा सदर की गदर ?

कार्यवाही के इंतज़ार में लेखपाल संघ..!, नही खत्म होता दिखता संबद्धीकरण, उच्चाधिकारियों के आदेश दरकिनार

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Monday, January 12, 2026

God knows...! When and how will anyone stop the rebellion in Sadar?

राजकुमार पाठक/राजेंद्र शुक्ला की संयुक्त कलम से

बांदा/मंडलायुक्त और जिलाधिकारी के लेखपालों के संबद्धीकरण के निरस्तीकरण को लेकर किए गए आदेश को बेअसर देखते हुए लेखपाल संघ ने भी बीते दिनों दिए गए ज्ञापन में अन्य मांगो के साथ संबद्धीकरण को लेकर भी मांग उठाई परंतु किसी प्रकार की कार्यवाही की कोई तस्वीर नजर नही आई ,जरूर जितनी जुबाने उतनी जुबानी चर्चाओ का बाजार गर्म होता जा रहा है। कोई कहता है कि पहले ” साहब ” ” संबद्धीकरण ” से जुड़े लेखपालों को अपने यहां से तो हटाए तब फिर आगे की तहसील सफाई कार्यवाही की बात करे, और तो और कोई कोई तो यहां तक कहता है कि जो अपने आदेशों की तामीली न करा सके वोह क्या संबद्धीकरण और क्या तहसील की सफाई करा पाएंगे..!..?

बताते चले कि जिलाधिकारी और मंडलायुक्त के आदेशों के बाद भी सदर तहसील में संबद्धीकरण के निरस्तीकरण का आदेश लगभग 2 माह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद लागू न हो पाने को लेकर जहां आम जन से लेकर तहसील कर्मियों की दबी जुबानी में तरह तरह की चर्चाओ का बाजार गर्म है और वहीं तहसील परिसर के इर्द गिर्द चाय नास्ते की दुकानों में बैठ कर जानकार कहते है कि परिषदादेशो और शासनादेशो की अनदेखी के चलते 3 साल की जगह 6 – 6 सालो से लेखपाल एक ही जगह पर जमे है और संबद्धीकरण सहित ऐसे लेखपालों को हटाने की चर्चा न केवल कोसो दूर है बल्कि हटाने के नाम पर खामोशी एक अहम सवाल बन कर खड़ी है।

लेखपालों के संबद्धीकरण को लेकर मंडलायुक्त ने 25 सितंबर 25 को जिलाधिकारी को पत्र लिखा था और जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्धता समाप्त करते हुए फील्ड में तैनात किए जाने का आदेश जिले की सभी तहसीलों के सभी उपजिलाधिकारियों को 6 अक्टूबर 25 को जारी किया गया था। लेकिन सदर तहसील में अमल में आज तक नही आया बावजूद इसके भी जब 8 जनवरी 26 को लेखपालसंघ ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन अपनी 5 सूत्रीय मांगो के पहले बिंदु में कहा था कि अगर संबद्धीकरण 15 दिवस के अंदर समाप्त कर संबद्ध लेखपालों को क्षेत्रों का चार्ज नहीं दिया गया तो उनके कार्य क्षेत्र के बस्तो को बांध कर रजिस्ट्रार कार्यालय तहसील बांदा में जमा करा दिया जायेगा, लेकिन अभी तक कोई भी जिम्मेदार आंख ने नजर उठा कर इस और देखने की हिमाकत नही की तब तहसील परिसर में कर्मचारियों और लेखपालोंकी जुबानों में चर्चा और चर्चाओ का जोर पकड़ना लाजमी होना कोई बड़ी बात नहीं है, और सवालों की झड़ी का झरना बहना स्वाभाविक प्रतीत होता है। सदर तहसील में मची गदर और नियम कानून की जगह चल रहे जंगलराज की कहानी यही नहीं समाप्त होती है,बल्कि तहसील के महत्वपूर्ण पटलो पर एक संप्रभु किस्म का नेटवर्क काम कर रहा है। जो प्रशासनिक और न्यायिक दोनो प्रकार के कामों को अपने मनमाने ढंग से अंजाम देता है। अधिकारी की एक बार मोहर लग जाने पर वह भी इसी नेटवर्क का हिस्सा बन जाता है।

साब..! एक नजर इधर भी..! ” दिया तले अंधेरा “

बांदा/सदर तहसील में जब संबद्ध लेखपालों को लेकर एक पड़ताल की गई तो, सूत्रों के हवाले से प्रकाश में आए नामो की एक फेहरिस्त इस प्रकार पता चली है जिसमे जिलाधिकारी के सदर कार्यालय में सलीम और शिव शंकर नामक लेखपाल संबद्ध है वहीं सदर तहसील में शिवाकांत, राममूर्ति, अम्बरीष, सचिंद्र और विजय एवम गोविंद नामक लेखपाल भी संबद्ध है। पड़ताल के दौरान ही लेखपाल संघ द्वारा दिए गए ज्ञापन में जिस मुन्ना नामक लेखपाल के निलंबन को लेकर बहाली के संबंध मेआवाज उठाई गई है तो सूत्रवत मिली जानकारियो के मुताबिक पता चला है उक्त लेखपाल एक वरासत के मामले में लिलंबित किया गया था और तो और दबी जुबाने तो यह भी बताती है कि तत्कालीन तहसीलदार के निर्देश और आदेश पर वरासत कराई गई थी लेकिन तहसीलदार पर कार्यवाही तो दूर किसी भी प्रकार की पूंछतांछ तक नही की गई।

जहां पर लेखपाल के निलंबन का मामला फाइलों में कैद है यदि कोई इंसाफ परस्त नजर इधर नजर डाले तो हकीकत की एक नई तस्वीर बन सकती है। जब लेखपाल संघ द्वारा दिए गए ज्ञापन और लेखपाल मुन्ना की बहाली के संबंध में लेखपाल संघ के जनपद महा सचिव रविन्द्र कुमार से अभी तक की प्रतीक्षित होने वाली कार्यवाही को लेकर इस बाबत दूरभाष से जब प्रगति जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि फिलहाल अभी तक का नतीजा शिफर है।

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