राजकुमार पाठक की कलम से
बांदा/रायफल क्लब खेल मैदान की नीलामी पर रोक, चुनावी वादे के तरह कोई भी चुनावी जुमला नही है जो छोड़ दिया और हो गया अपना काम..! यह बात आम जन जुबानी में कानून और राजस्व के मामलो के जानकार बुद्धिजीवियो की है अगर इनकी मानी जाए तो विकास प्राधिकरण बांदा जो कि पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए उसके द्वारा रायफल क्लब के मालिकाना हक को पाया है ।
शहर क्षेत्र में बदलते मौसम के साथ “मैदानो का मुद्दा” भी अखबारों से लेकर सोशल मीडिया की सुर्खियों में कोई न कोई तस्वीर लेकर भोर से ही शोर मचाने लगता है। ताजा तरीन चर्चाओ के मुताबिक रायफल क्लब मैदान की नीलामी के मामले को लेकर सदर विधायक द्वारा मैदान में आने के बाद मुख्यमंत्री और आयुक्त को नीलामी रोकने के लिखे गए पत्र के साथ शासन स्तर पर मुख्यमंत्री और सचिव से सीधी मुलाकात का हवाला देती मीडिया में छाई खबरों के मुताबिक मैदान की नीलामी पर रोक लग गई है, लेकिन आधिकारिक जानकारी इस बात की पुष्टि करने से इंकार कर रही है।
इन दिनों शहर के खासकर दो मैदान सुर्खियां बटोर रहे हैं। एक ओर मवई बाय पास चौराहे के समीप आगामी 16 जनवरी से होने वाली कथा के लिए चल रही मैदान में तैयारी और दूसरी ओर बी डी ए द्वारा रायफल क्लब मैदान को लेकर आगामी 21 जनवरी की घोषित नीलामी की तिथि पर अभी तक नीलामी रोकने के लिए उतरे सामाजिक और राजनैतिक गलियारों से उठा विरोध, जिसमे बबेरू सपा विधायक विशंभर यादव की विधान सभा में उठी आवाज़ से लेकर और कांग्रेस का मैदान में दिया गया ।
सांकेतिक धरना प्रदर्शन के तुरंत अगले दिन सपा द्वारा किया गया प्रदर्शन संग दिया गया ज्ञापन फिर सदर विधायक द्वारा रायफल क्लब मैदान की नीलामी रोकने के लिए लिखा गया मुख्यमंत्री को पत्र और सदर विधायक की लखनऊ पहुंच कर रायफल क्लब मैदान की नीलामी को लेकर हालातो की दी गई जानकारी और एका एक गुरुवार को शाम से नीलामी रोक पर चलने वाली खबरे सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोरने लगी। फिर क्या था, पुरानी राजनीति नई होने लगी। सपा का कहना है कि हमारा विरोध सरकार झेल न पाई और नीलामी पर रोक लग गई।
मैदान की नीलामी रोकने को लेकर जदयू की महिला नेत्री शालिनी पटेल भी अपने आपको रोक नही पाई और मैदान बचाने को मैदान में उतर आयुक्त को ज्ञापन सौप, अनशन की चेतावनी भी दे दी। विरोध के स्वर छात्र नेताओं संग सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी बुलंद किए। उधर सदर विधायक का पत्र और लखनऊ पहुंच कर एक सचिव से मुलाकात और मुख्यमंत्री से रायफल क्लब मैदान को लेकर बताए गए हालात के बाद नीलामी रोक के लिए निर्देश दिए गए है। ऐसी स्थिति मे मीडिया ने हकीकत टटोलने का जब प्रयास किया तो बड़ी मशक्कत के बाद जो बोल मिले उनमें सदर विधायक के बतौर प्रतिनिधि रजत सेठ ने फोन के जवाब में बताया कि नीलामी रोकने के लिए निर्देश आए है।
नीलामी रोक की खबरों को लेकर जनता उत्साहित भी है और बे हिचक यह भी कहती है कि इधर एक दम अंधेरे में नीलामी की हिचकोले खा रहे रायफल क्लब मैदान के मामले पर जब सदर विधायक प्रकाश ने मैदान पकड़ा तो नीलामी भी थोड़ी देर के लिए ही सही रास्ते से दूर हो गई है लेकिन रायफल क्लब मैदान की नीलामी पर लगी रोक को लेकर जब बी डी ए सचिव से मुलाकात कर मीडिया की एक टीम ने हकीकत जानने का प्रयास शुक्रवार को किया तो उनका कहना था कि अभी तक कोई आधिकारिक आदेश उन्हे नही मिला है।
ज़रूर शासन तक रायफल क्लब मैदान के प्रकरण सहित पहले बी डी ए के पक्ष में हुए बैनामा समेत अन्य बिंदुओं की जानकारी जरिए रिपोर्ट शासन स्तर तक भिजवाई गई है। हालाकि फिलहाल मिली सूत्रवत जानकारियों की माने तो नीलामी प्रक्रिया ठहरी है। अब जगह जगह जुबानी चर्चाओ का बाजार गर्म है, अपने आपको राजनैतिक विश्लेषक बताने वाले चाय की दुकान में चुस्कियों भरी जुबानी है कि यह एक राजनैतिक स्टंट है, चर्चाओ के दौरान ज़ुबाने यह भी कहती है कि पहले “किसी भी माल का बिक्री रेट बड़ा दिया जाता है फिर जब जनता महंगाई से लगाकर बढ़ती दरो को घटाने के लिए हो हल्ला भरी आवाज उठाती है तो आम जनता के विरोध और आक्रोश को कम करने के लिए बढ़ाई गई दरो को थोड़ा कम कर जनता के आक्रोश को ठंडा करने काम करती है। अब रायफल क्लब मैदान को लेकर भी ऐसी ही कुछ जन जुबानी टिप्पणियां उछाले मरती हुई सुनाई पड़ती है सच का भविष्य क्या है यह तो आगे आगे देखते है होता है क्या…!..?






