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कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीक पर जोर, शिवराज सिंह चौहान का बहुपक्षीय संस्थानों के साथ मंथन

डिजिटल एग्रीकल्चर, हाई वैल्यू क्रॉप्स और जल संरक्षण पर कृषि मंत्रालय गंभीरता से कर रहा कार्य

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Thursday, January 8, 2026

Shivraj Singh Chouhan discusses innovation and technology in agriculture sector with multilateral institutions

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को कृषि मंत्रालय में बहुपक्षीय संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक का उद्देश्य भारतीय कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और किसान-हितैषी बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभवों, नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचार-विमर्श करना था।

बैठक के दौरान बहुपक्षीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने कृषि मंत्री के समक्ष खेती-किसानी से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। इन सुझावों में किसानों की आय बढ़ाने, फसल उत्पादकता में सुधार, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और कृषि क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिनिधियों ने बताया कि किस प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और उन्नत क्रॉप मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से फसलों की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकती है, जिससे उत्पादन बढ़ाने और जोखिम कम करने में सहायता मिल सकती है।

बैठक में हाई वैल्यू क्रॉप्स, ऑर्गेनिक फार्मिंग, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि इन क्षेत्रों में सही नीतिगत समर्थन और तकनीकी सहयोग से किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है और कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बैठक में प्राप्त अधिकांश सुझावों पर कृषि मंत्रालय पहले से ही योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि पोषण आधारित खेती, मांग आधारित कृषि उत्पादन, और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं और परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि जल संरक्षण और जल के अधिकतम उपयोग को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सिंचाई दक्षता बढ़ाने, माइक्रो-इरिगेशन और जल-संरक्षण तकनीकों को अपनाने से किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी।

कृषि मंत्री ने कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर भारत की कृषि नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इस दिशा में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-नाम, डिजिटल फसल आकलन और तकनीक आधारित सेवाओं के माध्यम से कृषि को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और किसान-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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