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कानपुर में 200 करोड़ की शादी से उठा पर्दा — अफसर और अपराधी गठजोड़ पर जांच तेज

भ्रष्टाचार, फर्जी मुकदमे, ब्लैकमेलिंग और बेनामी संपत्तियों का जाल, जांच की आंच में आया चर्चित पुलिस अधिकारी "ऋषिकांत शुक्ला"

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Friday, November 7, 2025

.कानपुर का “करोड़ों का दरोगा” — डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला की संपत्ति पर उठे सवाल, 200 करोड़ की शादी बनी जांच का केंद्र

. भ्रष्टाचार की परतें खुलीं: दरोगा से डीएसपी तक सफर, करोड़ों की अघोषित संपत्ति और अपराधियों से सांठगांठ के आरोप

संवाददाता हरिओम द्विवेदी-कानपुर: शुक्रवार शहर के चर्चित पुलिस अधिकारी ऋषिकांत शुक्ला पर भ्रष्टाचार और अपराधियों से सांठगांठ के गंभीर आरोप लगने के बाद पुलिस व प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि एक समय दरोगा रहे शुक्ला ने अपने कार्यकाल में करोड़ों की संपत्ति अर्जित की। हाल ही में उनके बेटे की 200 करोड़ रुपये की भव्य शादी और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों से उनके संबंधों ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।

सूत्रों के अनुसार, ऋषिकांत शुक्ला, जो कभी कानपुर में बतौर दरोगा तैनात थे, बाद में डीएसपी पद तक पहुंचे। जांच रिपोर्टों में खुलासा हुआ है कि वर्ष 1998 से 2009 तक उन्होंने कानपुर में तैनाती के दौरान आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों, विशेषकर चर्चित नाम अखिलेश दुबे से घनिष्ठ संबंध बनाए।

दुबे पर दर्जनों आपराधिक मुकदमे हैं, जिनमें फर्जी केस दर्ज कराना, जबरन वसूली, और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। यही नहीं, दुबे और शुक्ला के रिश्तेदारों के नाम पर कंपनियां बनाई गईं, जिनके माध्यम से कथित रूप से काले धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) का काम किया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, शुक्ला और दुबे की मिलीभगत से कई फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए, जिनके जरिए लाखों रुपये की वसूली की गई। इन मुकदमों में कुछ पीड़ितों ने आगे चलकर शिकायतें कीं, परंतु लंबे समय तक प्रभावशाली दबाव के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

मार्च माह में ऋषिकांत शुक्ला ने अपने बेटे की शादी कानपुर के एक लक्ज़री रिसॉर्ट में भव्य तरीके से की, जिसमें कथित तौर पर डीजी, एडीजी, विधायक, सांसद और कई राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं। शादी का अनुमानित खर्च लगभग 200 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

जांच एजेंसियों को शक है कि यह संपत्ति अघोषित स्रोतों से अर्जित की गई है, जिसके दस्तावेज भी संदिग्ध हैं।
बताया जा रहा है कि आर्यनगर, स्वरूप नगर, लाजपत नगर और आसपास के क्षेत्रों में उनके और उनके सहयोगियों के नाम पर कई दुकानें व मकान हैं, जिनकी वैधता की जांच जारी है।

इसी बीच, एसआईटी द्वारा दर्ज प्राथमिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि शुक्ला और उनके सहयोगी अखिलेश दुबे ने एक लोकल न्यूज़ चैनल शुरू किया, जिसके माध्यम से वे स्थानीय पुलिसकर्मियों को अपने प्रभाव में लेकर जनता पर दबाव बनाते थे।

⚖️ जांच और कार्रवाई की दिशा

सूत्रों की मानें तो एसआईटी ने इस प्रकरण में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) से भी रिपोर्ट मांगी है। यदि आरोप सही पाए गए तो यह कानपुर का अब तक का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति कांड माना जाएगा।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब राज्य सरकार माफियाओं और भू-माफियाओं पर बुलडोजर चला रही है, तो ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर भी समान कार्रवाई की जानी चाहिए।

📌 जनता की मांग:-

जनता अब यह सवाल उठा रही है — “जब एक पुलिस अधिकारी 11 वर्षों में 200 करोड़ का मालिक बन जाए, तो क्या यह सिस्टम की नाकामी नहीं?”

जनता चाहती है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस पूरे प्रकरण पर पारदर्शी जांच हो और दोषी पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई की जाए।

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