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दिल्ली मुख्यालय तक पहुँची मानवाधिकार के ‘फर्जीवाड़े’ की गूंज; रजिस्ट्रेशन रद्द करने की लटकी तलवार

फर्जी 'लोक सेवक' बनकर जनता को डराने वालों की अब खैर नहीं; RTI के शिकंजे में फंसा 'समग्र मानव अधिकार एसोसिएशन' का पूरा कुनबा।

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Saturday, January 31, 2026

नई दिल्ली/सोनभद्र: राजधानी दिल्ली स्थित रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज (GNCT of Delhi) के कार्यालय में एक धमाकेदार RTI दाखिल होने से ‘समग्र मानवाअधिकार एसोसिएशन’ के खेमे में खलबली मच गई है। दिल्ली मुख्यालय से सीधे तौर पर जवाब मांगते हुए पूछा गया है कि भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में लिप्त इस संस्था की मान्यता अभी तक रद्द क्यों नहीं की गई?

​दिल्ली से तय होगा संस्था का भविष्य

​यह मामला अब केवल स्थानीय स्तर का नहीं रहा, बल्कि सीधे दिल्ली सरकार के पाले में है। RTI के जरिए दिल्ली मुख्यालय से संस्था की वर्ष 2012 से अब तक की पूरी ऑडिट रिपोर्ट और बैलेंस शीट की फाइलें खोलने को कहा गया है। विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि जब संस्था के खिलाफ गंभीर शिकायतें मिल रही हैं, तो इसके पंजीकरण को निरस्त करने में देरी क्यों हो रही है?

​सरकारी तंत्र को खुली चुनौती

​संस्था के पदाधिकारी जिस तरह से अशोक स्तंभ और लाल नीली बत्ती-हूटर का इस्तेमाल कर खुद को सरकारी अधिकारी के रूप में पेश कर रहे हैं, उसकी पूरी रिपोर्ट दिल्ली भेजी गई है। ‘एम्बलेम्स एंड नेम्स एक्ट 1950’ का उल्लंघन करने और पुलिस की तर्ज पर फर्जी ‘TIR’ (उत्पीड़न सूचना रिपोर्ट) काटकर जनता को डराने के इस सिंडिकेट का अब अंत निश्चित है।

​भ्रष्टाचार की आंच में झुलसेंगे ‘फर्जी’ पदाधिकारी

​RTI ने उन चेहरों को बेनकाब करने की मांग की है जो मानवाधिकार के नाम पर पदों की खरीद-फरोख्त और अवैध वसूली के धंधे में शामिल हैं। दिल्ली मुख्यालय को भेजे गए दस्तावेजों में साफ तौर पर नियमों के उल्लंघन और संस्था के भीतर चल रही आपसी कलह का जिक्र किया गया है।

​विशेष नोट: दिल्ली से जांच शुरू होते ही उन सभी लोगों पर कानूनी शिकंजा कसना तय है, जो खुद को ‘लोक सेवक’ बताकर अवैध धौंस जमा रहे हैं। अब देखना यह है कि दिल्ली रजिस्ट्रार कार्यालय इस फर्जीवाड़े पर अंतिम प्रहार कब करता है।

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