अजय कुमार/सहरसा
बिहार। मैथिली साहित्यिक संस्था मैथिली शब्दलोक के तत्वावधान में प्रमंडलीय पुस्तकालय में भाषा विचारक डॉ राम चैतन्य धीरज के तीन भिन्न भाषा में तीन पुस्तकों “विज्ञान का दर्शन,दर्शन का विज्ञान”,एसेंस ऑफ माइंड और अलखनंदा शक्ति स्तोत्रम जो क्रमशः हिंदी ,अंग्रेजी और संस्कृत में है,का लोकार्पण किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता ललित नारायण मिथिला विश्विद्यालय के रसायनशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो प्रेम मोहन मिश्र और संचालन डॉ प्रदीप प्रांजल ने किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो मिश्र ने विज्ञान और दर्शन के बीच के अंतर्संबंधों का जिक्र करते हुए बताया कि भारतीय दर्शन में हमारे आधुनिक विज्ञान के कई सूत्र छुपे हुए हैं ।जिन्हें जानने और समझने की आवश्यकता है।कुमार विक्रमादित्य ने अपने बीज वक्तव्य में तीनों पुस्तकों पर गंभीरता से प्रकाश डाला। वहीं एजुकेटर्स के डायरेक्टर प्रवीण झा ने वैशेषिक दर्शन और प्रस्तुत पुस्तक के कई पहलू पर समांतर रूप से बात कही और उन्होंने कहा कि बिग बैंग के सिद्धांत जिस तरह से लोकप्रिय हुए वैसी लोकप्रियता बिग क्रंच के सिद्धांत को नहीं मिला।
जिसे लेखक ने बहुत ही गंभीरता से लिया है।करीब चार घंटे तक तीनों पुस्तकों पर वक्ताओं ने अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी रखी। वक्ताओं में डॉ परितोष कुमार अमर, डॉ व्योमेश विभव झा, डॉ प्रत्यक्षा राज,मुक्तेश्वर मुकेश,रणविजय राज,दिलीप चौधरी, शैलेन्द्र शैली आदि शामिल रहे।अंत में धन्यवाद ज्ञापन मैथिली शब्दलोक के संस्थापक मुख्तार आलम ने किया।इस अवसर पर मनोज कुमार, शैलेन्द्र स्नेही,आनंद कुमार,प्रशांत कुमार ,ललन कुमार सहित अन्य मौजूद रहें।







