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इस वर्ष का पोषण अभियान खास रहा क्यूंकि इस बार महिलाओं के साथ पुरुषों को भी अभियान में भागीदार बनाया गया : सावित्री ठाकुर

देशभर में 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सेवाएँ प्रदान की जा रही

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Friday, October 17, 2025

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देहरादून : आठवें राष्ट्रीय पोषण माह 2025 का समापन समारोह शुक्रवार को हिमालयन कल्चरल सेण्टर, देहरादून में आयोजित किया गया। इस अवसर पर भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। यह आयोजन पोषण जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन को समर्पित एक माह लंबे जन आंदोलन के समापन का प्रतीक रहा। समारोह में उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या, उत्तराखंड के कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी, भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव लव अग्रवाल, उत्तराखंड महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के सचिव चंद्रेश कुमार यादव तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव श्रीमती राधिका झा भी उपस्थित रहीं।
राष्ट्रीय पोषण माह के समापन अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए श्रीमती सावित्री ठाकुर ने कहा कि पोषण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह भारत के प्रत्येक बच्चे और माँ के प्रति हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी और नैतिक प्रतिबद्धता है।” उन्होंने कहा कि 8 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया पोषण अभियान अब एक परिवर्तनकारी जन आंदोलन बन चुका है, जो अनेक मंत्रालयों और नागरिकों को एक साझा दृष्टिकोण — “सशक्त नारी, सुपोषित भारत” के तहत जोड़ता है। उन्होंने कहा कि जीवन के पहले 1000 दिन गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो वर्ष की आयु तक विकास और वृद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ माँ एक सशक्त पीढ़ी को जन्म देती है, जब हर घर की थाली संतुलित होती है, तभी देश सशक्त बनता है।
केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार के महत्व पर बल देते हुए कहा कि महिलाएँ प्रत्येक परिवार की आधारशिला हैं। उन्होंने मन की बात कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि मोटापा आज एक बड़ी समस्या बन चुका है, और पोषण माह का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से पोषण को एक जन आंदोलन बनाना है। उन्होंने कहा कि इस बार का पोषण माह इसलिए भी खास रहा क्यूंकि इस बार केवल महिलाएँ ही नहीं, बल्कि पुरुष और युवा भी पोषण माह का अभिन्न हिस्सा बने हैं, जिससे यह वास्तव में समावेशी अभियान बना। उन्होंने कहा कि आज के सुपोषित भारत के बच्चे ही वर्ष 2047 के सुपोषित भारत के नागरिक होंगे। उन्होंने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की भी सराहना की और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।

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