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कोटा मेडिकल कॉलेज में ‘मौत का ऑपरेशन’, 2 प्रसूताओं की मौत, 6 की किडनी फेल, मची चीख-पुकार

Kota News: कांग्रेस का वार- 'यह मौत नहीं, सीधे तौर पर हत्या है'

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Sunday, May 10, 2026

राजस्थान के कोटा शहर से एक बेहद खौफनाक और स्वास्थ्य महकमे को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. यहां के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में ‘सिजेरियन डिलीवरी’ के बाद महिलाओं के लिए अस्पताल मानों मौत का कुआं बन गया.

ऑपरेशन के बाद अब तक 2 गर्भवती महिलाओं की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि आधा दर्जन से ज्यादा प्रसूताओं की हालत बेहद गंभीर है और वे जिंदगी की जंग लड़ रही हैं. इस बड़ी लापरवाही के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है.

जानकारी के मुताबिक, 3 और 4 मई को सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. ऑपरेशन के बाद इन सभी महिलाओं में यूरिन (पेशाब) बंद होने, प्लेटलेट्स तेजी से गिरने, ब्लड प्रेशर लो होने और किडनी फेल होने जैसे बेहद गंभीर लक्षण सामने आए. आशंका जताई जा रही है कि ऑपरेशन के वक्त महिलाओं को जो इंजेक्शन या दवाएं दी गईं, वे खराब थीं या फिर ऑपरेशन थिएटर (OT) में कोई जानलेवा संक्रमण (Infection) फैल गया था.

अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह रहा कि पहली कुछ महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के बावजूद, डॉक्टरों ने किरण और शिरीन नाम की दो अन्य गर्भवती महिलाओं की सर्जरी कर दी. ऑपरेशन के बाद इन दोनों की भी तबीयत उसी तरह बिगड़ गई. फिलहाल दवाओं, इंजेक्शन और उस ओटी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है.

मामले के तूल पकड़ते ही भजनलाल शर्मा सरकार एक्शन मोड में आ गई है. जयपुर के एसएमएस (SMS) मेडिकल कॉलेज से विशेषज्ञों की दो टीमें कोटा भेजी गई हैं—एक टीम इलाज के लिए और दूसरी मामले की जांच के लिए. इस बीच स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने गंभीर महिलाओं को एयर एंबुलेंस से जयपुर ले जाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे आक्रोशित परिजनों ने ठुकरा दिया और अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया. राजस्थान सरकार के मंत्री हीरालाल नागर ने अस्पताल पहुंचकर हालात का जायजा लिया है.

इस दर्दनाक हादसे के बाद सियासत भी गरमा गई है. पूर्व चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा की अगुवाई में कांग्रेस नेताओं ने अस्पताल का दौरा किया. कांग्रेस प्रदेश सचिव पुष्पेंद्र भारद्वाज ने इसे मौत नहीं बल्कि हत्या करार देते हुए पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की मांग की है. विपक्ष ने सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को अब तक कोटा जाने की फुर्सत क्यों नहीं मिली?

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