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ककड़िया में मौन रहकर बच्चों ने सीखी आनापन ध्यान साधना

आनापान ध्यान साधना से बच्चों में एकाग्रचित्तता बढ़ती है

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Saturday, November 22, 2025

In Kakariya, children learned Anapana meditation by remaining silent.

अमन चौधरी जिला कोऑर्डिनेटर नालंदा बिहार

नूरसराय-ककड़िया : मध्य विद्यालय ककड़िया के प्रांगण में शनिवार को विद्यालय के चेतना सत्र में एक दिवसीय आनापान ध्यान साधना का आयोजन प्रधानाध्यापक श्री दिलीप कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। जिसमें स्कूल के 278 बच्चे और बच्चियों ने भाग लिया।

मौके पर शिक्षाविद प्रधानाध्यापक श्री दिलीप कुमार ने बताया कि विपश्यना, जिसका अर्थ है ‘चीजों को वैसा ही देखना जैसी वे हैं’, एक प्राचीन ध्यान तकनीक है जिसकी जड़ें लगभग 2500 वर्ष पूर्व के प्रारंभिक बौद्ध धर्म में है। आनापान ध्यान साधना से बच्चों में एकाग्रचित्तता बढ़ती है। पढ़ाई में मन लगता है और मन शांत होता है। बच्चे अपने मन को वश में करना सीखते हैं। इसमें बच्चों को पांच शील पालन करना और उनका जीवन में महत्त्व समझाया जाता है। शील पालन साधना का अभिन्न अंग है। यह पांच शील जीव हत्या नहीं करना, चोरी नहीं करना, ब्रह्मचर्य का पालन करना, सत्य बोलना और नशा नहीं करना हैं। विद्यार्थियों ने मंगल-मैत्री ध्यान का अभ्यास भी किया। यह अभ्यास उन्हें मन शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और खुद को बेहतर समझने में मदद करता है, और इसे बचपन से ही शुरू करने की सलाह दी जाती है।

मौके पर विद्यालय कर वरीय शिक्षक राकेश बिहारी शर्मा ने उपस्थित विद्यार्थियों के बीच अपने उद्बोधन में कहा कि आनापान “विपश्यना” ध्यान साधना का एक हिस्सा है, जो बच्चों के मानसिक प्रशिक्षण के लिए यह एक सरल तकनीक है। यह बच्चों को अपने प्राकृतिक श्वास पर ध्यान केंद्रित करके मन को शांत और एकाग्र करना सिखाता है, जिससे वे अपने मन की कार्यप्रणाली को समझ सकें और उसे नियंत्रित कर सकें। यह ध्यान बच्चों को भय, चिंता और तनाव से निपटने में भी मदद करता है और नैतिक आचरण के लिए एक मजबूत नींव बनाने में सहायक होता है।

उन्होंने आनापान के विशेष लाभ के बारे में कहा कि यह बच्चों को एकाग्रता, आत्म-अनुशासन और सजगता बढ़ाने में मदद करता है। इससे चिड़चिड़ापन और हीनता की भावना कम होती है। यह बच्चों को भय, चिंताओं और दबावों से निपटने में सक्षम बनाता है। यह उन्हें अपने मन को नियंत्रित करना और सही चुनाव करना सिखाता है। यह छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

इस मौके पर विद्यालय के शिक्षक जितेंद्र कुमार मेहता, शिक्षिका अनीता कुमारी, शिक्षक मो. रिजवान अफताब, अनुज कुमार, सतीश कुमार, रणजीत कुमार सिन्हा, विश्वरंजन कुमार, मुकेश कुमार, बाल संसद के प्रधानमंत्री अर्जुन कुमार, शिक्षामंत्री सलोनी कुमारी, दिव्या भारती, अंजली कुमारी, मुश्कान कुमारी, राज नंदनी कुमारी, खुशी कुमारी, वर्षा कुमारी, राखी कुमारी, राशि कुमारी, लभली कुमारी, नंदनी कुमारी, स्नेहा कुमारी, चांदनी कुमारी, नीतु कुमारी, रेखा कुमारी, जौशन कुमार, राजवीर कुमार, आदित्य कुमार, सुमन कुमारी, तथा विद्यालय परिवार के सभी सदस्यगण उपस्थित रहे।

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