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उपराष्ट्रपति ने एसआरएम विश्वविद्यालय दिल्ली-एनसीआर, सोनीपत के तीसरे दीक्षांत समारोह में भाग लिया

छात्रों के गुरुओं और मार्गदर्शकों की सराहना की तथा कहा कि आज की उपलब्धियां उनके अथक मार्गदर्शन, समर्थन और अटूट प्रयासों का प्रतिबिंब

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Friday, November 7, 2025

Vande Mataram is not just a word – it is a mantra, an energy, a dream and a sacred resolution

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों को बधाई दी और कहा कि उनकी डिग्रियां न केवल अकादमिक उपलब्धि को बल्कि विश्वविद्यालय में अपने कार्यकाल के दौरान उनके द्वारा विकसित मूल्यों, अनुशासन और लचीलेपन को भी दर्शाती हैं। उन्होंने छात्रों के गुरुओं और मार्गदर्शकों की सराहना की तथा कहा कि आज की उपलब्धियां उनके अथक मार्गदर्शन, समर्थन और अटूट प्रयासों का प्रतिबिंब हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञता और शैक्षणिक उत्कृष्टता तो महत्वपूर्ण हैं ही, छात्रों को अपने साथ कुछ और भी आवश्‍यक गुण – मूल्य और चरित्र भी रखने चाहिए। उन्होंने चरित्र निर्माण में अच्छी आदतों और अनुशासन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि चरित्र खो जाने पर सब कुछ खो जाता है।

सी.पी.राधाकृष्णन ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है जिन्‍होंने 54 विश्वविद्यालयों की सूची में स्थान बनाया है। भारत इस वैश्विक रैंकिंग में चौथा सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला देश है।

उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने एक परिवर्तनकारी रोडमैप तैयार किया है – जो बहु-विषयक शिक्षा, लचीलेपन और अनुसंधान-संचालित विकास की परिकल्पना करता है तथा भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनने के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि अध्‍ययन में ऐसा लचीलापन पहले उपलब्ध नहीं था। उन्होंने छात्रों से एनईपी 2020 द्वारा प्रदान किए गए अवसरों का पूरा उपयोग करने का आग्रह किया।

सी.पी. राधाकृष्णन ने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत के विजन में सभी लोगों के लिए समावेशी और समतापूर्ण विकास का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि लक्षित छात्रवृत्तियों, वित्तीय सहायता और लोकसंपर्क पहलों के माध्यम से निरंतर सरकारी प्रयासों से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्रों सहित हाशिए पर रह रहे समुदायों के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।  ग्रामीण क्षेत्रों और महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सही शिक्षा और कौशल के साथ, हमारे युवा एक नए भारत – एक ऐसा भारत जो नवोन्मेषी, समावेशी और समानता, न्याय और स्थिरता के आदर्शों से प्रेरित हो – की प्रेरक शक्ति बन सकते हैं। उपराष्ट्रपति ने छात्रों को दूसरों से अपनी तुलना न करने का सुझाव देते हुए कहा कि आज के विश्‍व में अपार अवसर हैं और हर किसी की अपनी विशिष्ट भूमिका है। उन्होंने कहा कि निरंतर और समर्पित प्रयास परिणाम देते हैं और लक्ष्यों को अर्जित करने में मदद करते हैं।

उन्होंने जीवन में एक संतुलित दृष्टिकोण – न तो जीत पर अति प्रसन्न हों और न ही असफलता पर अधिक निराश – बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विफलताएं जीवन का अभिन्न अंग हैं और इन्हें ऐसे अनुभवों के रूप में देखा जाना चाहिए जो मानसिक दृढ़ता को सुदृढ़ करते हैं। यह बताते हुए कि कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है, उन्‍होंने कहा कि प्रसन्‍नता एक मानसिक स्थिति है। उन्होंने अवसरों से भरी इस दुनिया में सही मानसिकता विकसित करने के महत्व पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन के समापन पर विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने माता-पिता को सदैव याद रखें तथा अपने बच्चों के विकास और सफलता के लिए उनके त्याग और आजीवन समर्पण को स्वीकार करें।

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