स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने की विभागीय कार्यों की समीक्षा - राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक - लापता मानसिक रूप से मंदित बालिका 17 घंटे बाद सकुशल बरामद,झाड़ियों के पास बैठी मिली - कौशल विकास में पारदर्शिता और गुणवत्ता पर योगी सरकार का जोर - 2019 के बहुचर्चित आदित्य सिंह हत्याकांड में आया फैसलास्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने की विभागीय कार्यों की समीक्षा - राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक - लापता मानसिक रूप से मंदित बालिका 17 घंटे बाद सकुशल बरामद,झाड़ियों के पास बैठी मिली - कौशल विकास में पारदर्शिता और गुणवत्ता पर योगी सरकार का जोर - 2019 के बहुचर्चित आदित्य सिंह हत्याकांड में आया फैसला

न्याय की लड़ाई में पीड़ित के साथ खड़े हुए दीपांकर मिश्रा एडवोकेट, की नि:शुल्क पैरवी

न्यायालय के आदेश पर अछल्दा पुलिस को FIR दर्ज करने के निर्देश

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Sunday, June 28, 2026

औरैया। थाना अछल्दा क्षेत्र के एक निवासी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने थाना अछल्दा पुलिस को सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराने के निर्देश दिए हैं।

प्रार्थी के अनुसार, दिनांक 27 मार्च 2026 की रात्रि लगभग 9:00 बजे वह अपनी पत्नी के साथ टहलकर घर वापस लौटा, तभी उसने अपने घर से रोशन नामक व्यक्ति को निकलते हुए देखा। आरोप है कि पूछताछ करने पर उक्त व्यक्ति ने प्रार्थी को धक्का देकर गिरा दिया और मौके से फरार हो गया।

प्रार्थी का आरोप है कि घर के अंदर जाने पर उसकी पत्नी राजरानी की चांदी की तोड़िया अलमारी से गायब मिली, जिससे चोरी की आशंका व्यक्त की गई। प्रार्थी के अनुसार जब वह एवं उसकी पत्नी इस संबंध में शिकायत करने के लिए अखिलेश कुमार के घर पहुंचे, तो उनके साथ गाली-गलौज की गई।

प्रार्थी ने न्यायालय को बताया कि कुछ समय बाद रोशन, अखिलेश कुमार, मालती देवी सहित अन्य लोग एक राय होकर उसके घर में जबरन घुस आए तथा गाली-गलौज करते हुए उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि बीच-बचाव करने आई प्रार्थी की पत्नी राजरानी के साथ भी मारपीट की गई तथा गलत नीयत से उसके कपड़े फाड़ दिए गए। वहीं मालती देवी पर प्रार्थी की उंगली तोड़ने का आरोप लगाया गया है। घटना के दौरान मोहल्ले के लोगों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।

प्रार्थी का कहना है कि घटना की सूचना थाना अछल्दा एवं पुलिस अधीक्षक औरैया को दी गई, किन्तु कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके पश्चात प्रार्थी ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय में प्रार्थी द्वारा शपथपत्र, चिकित्सीय अभिलेख, एक्स-रे प्लेट एवं अन्य प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।

मामले की सुनवाई के उपरांत माननीय न्यायालय ने प्रकरण को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला मानते हुए प्रार्थना पत्र स्वीकार कर थाना अछल्दा पुलिस को सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी पंजीकृत कर विवेचना कराने के निर्देश दिए हैं।

इस प्रकरण में पीड़ित परिवार की ओर से एडवोकेट दीपांकर मिश्रा द्वारा नि:शुल्क पैरवी की गई। पीड़ित परिवार ने एडवोकेट दीपांकर मिश्रा के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान की, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में उनके साथ खड़े रहकर न्याय मिलने की नई उम्मीद भी जगाई। परिवार का कहना है कि एडवोकेट दीपांकर मिश्रा ने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया और पूरी निष्ठा के साथ उनका पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले