राजकुमार पाठक की कलम से
बांदा/ जनपद के पैलानी तहसील अंतर्गत ग्राम गौरी कलां में मौसी का घर और मंजू समाज में नशे की बढ़ती गिरफ्त और इसके भयावह परिणामों का एक ज्वलंत उदाहरण बन तब सामने आया, जब एक साहसी दुल्हन के रूप में मंजू ने मंडप में नशे में धुत दूल्हे से शादी करने से साफ इनकार कर दिया। जिसने नशे के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। जो आज बतौर मिशाल बन कर नशे के खिलाफ साहसी आवाज बन कर समाज के लिए एक नजीर बन कर उभरी है।
बताते चले कि मामला मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की छिंदा गांव निवासी मंजू वर्मा (22 वर्ष) की शादी फतेहपुर के चांदपुर थाना क्षेत्र के आजमपुर गांव के निवासी श्याम से तय हुई थी से शुरू हुआ था और 4 दिसंबर को मंजू की मौसी के घर, गौरीकलां में बारात आई। और शादी की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं जब वरमाला की रस्म शुरू होने वाली थी। सूत्रों के अनुसार, दूल्हा श्याम शराब के नशे में बुरी तरह धुत था और लड़खड़ा रहा था।
जैसे ही मंजू ने दूल्हे की यह हालत देखी, उसने तुरंत शादी से मना कर दिया। दुल्हन मंजू ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जो व्यक्ति अपने सबसे महत्वपूर्ण दिन पर नशे में चूर है, वह मेरा जीवनसाथी बनने योग्य नहीं है। मैं किसी नशेड़ी के साथ अपनी पूरी जिंदगी नहीं बिता सकती। मेरे भविष्य की चिंता जायज है, नशा पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है।” दूल्हे पक्ष और लड़की पक्ष के लोगों ने मंजू को समझाने की भरसक कोशिश की।
मामला बढ़ता देख तत्काल स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पैलानी थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को सुना। पुलिस और रिश्तेदारों के दबाव के बावजूद, मंजू अपने फैसले पर अडिग रही। उसने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी हाल में नशेड़ी दूल्हे से शादी नहीं करेगी। मंजू का यह फैसला केवल एक व्यक्तिगत अस्वीकृति नहीं, बल्कि उन लाखों महिलाओं की पीड़ा का प्रतिनिधित्व करता है जो नशे के शिकार पतियों के साथ हिंसा, आर्थिक बर्बादी और बच्चों के बर्बाद भविष्य का दंश झेलती हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मीनाक्षी देवी ने घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मंजू का कदम स्वागत योग्य है। यह समाज को जगाने वाला एक जोरदार थप्पड़ है। जब तक सरकारें राजस्व की लालच में शराब की दुकानें हर नुक्कड़ पर खोलती रहेंगी और नशामुक्ति के वादे सिर्फ भाषणों तक सीमित रहेंगे, तब तक हमारी युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में फंसती रहेगी। हमें एकजुट होकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ खड़ा होना होगा।” विशेषज्ञों का कहना है कि मंजू वर्मा का साहसिक विद्रोह दर्शाता है कि अब महिलाएं चुपचाप अन्याय सहने को तैयार नहीं हैं।
यह घटना सरकारों और समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि राजस्व के लिए नशे को बढ़ावा देना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सख्त कानून, शराब बिक्री पर कड़े प्रतिबंध और प्रभावी नशामुक्ति अभियान ही इस समस्या से निजात दिला सकते हैं। मंजू वर्मा ने अपने एक फैसले से लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा और विद्रोह का मार्ग प्रशस्त किया है। उधर एक सामाजिक संगठन ने मंजू को सम्मानित किया है।







