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जमीन पर कब्जे के प्रयास और धमकी के मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश,सीजेएम कोर्ट का कड़ा रुख,

न्यायालय के आदेश की अवहेलना और धमकी के आरोपों पर सुनवाई, संबंधित थानाध्यक्ष को एक सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट देने के निर्देश

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Wednesday, August 12, 2026

फर्रुखाबाद। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष को तुरंत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला महेश वर्मा बनाम मुन्ना खां आदि प्रकीर्ण वाद संख्या 1448/2026 से जुड़ा है, जिस पर अदालत ने 10 अगस्त 2026 को अपना यह आदेश सुनाया।

क्या है पूरा मामला?

आवेदक महेश वर्मा की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। इसमें विपक्षीगण मुन्ना खां और जितेन्द्र शाक्य आदि के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। प्रार्थना पत्र में गंभीर आरोप लगाए गए कि विपक्षीगण द्वारा न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए आवेदक की भूमि पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। जब इसका विरोध किया गया, तो आरोपियों द्वारा अभद्रता की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर भी न्यायालय के आदेशों का पालन न कराने और उदासीनता बरतने के आरोप लगाए गए थे।

अदालत की सख्त टिप्पणी और निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित थाने से मंगाई गई आख्या का अवलोकन किया। पुलिस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि इस मामले में थाने पर पहले से कोई अभियोग पंजीकृत नहीं है। मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर गहन विचार करने के बाद, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आवेदक का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया। अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष को आदेश दिया है कि प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर सुसंगत धाराओं में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। एफआईआर दर्ज करने के पश्चात एक सप्ताह के भीतर इसकी अनुपालन सूचना न्यायालय को प्रेषित की जाए। अदालत के इस कड़े आदेश के बाद अब संबंधित थाना पुलिस द्वारा मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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