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बाल उमंग पखवाड़ा : संस्कृति और सृजनशीलता से भरपूर भव्य झांकी का आयोजन

कार्यक्रम में सैकड़ों बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया झांकी में बच्चों मौहल्ला भ्रमण किया

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Friday, November 28, 2025

Bal Umang Pakhwada: A grand tableau full of culture and creativity

अजय कुमार सहरसा। शिक्षा विभाग द्वारा स्थापित किलकारी बिहार बाल भवन में आगामी बाल दिवस के अवसर पर बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए ‘बाल उमंग पखवाड़ा’ का आयोजन 30 नवम्बर तक किया जा रहा है।बाल उमंग पखवाड़ा के अंतर्गत शुक्रवार को विविध रंगों, संस्कृति और सृजनशीलता से भरपूर भव्य झांकी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया झांकी में बच्चों मौहल्ला भ्रमण किया। साथ ही यह झांकी किलकारी के परिसर से निकलते हुए कचहरी ढाला, शिवपुरी, पासवान टोला, महाराणा प्रताप चौक, बम्फर चौक, पंचवटी से गंगजला होते हुए बच्चे पुनः किलकारी सहरसा परिसर आये और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए पूरे परिसर को उल्लासपूर्ण माहौल से भर दिया।

इस अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में विशेष तौर पर आमंत्रित रहे। उनके आगमन पर किलकारी के बच्चों ने भव्य स्वागत नृत्य एवं पारंपरिक बिहू नृत्य प्रस्तुत कर संस्कृति की झलक को जीवंत कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने मुख्य अतिथि सहित सभी उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।साथ ही मुख्य अतिथि जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बच्चों के साथ झांकी को हरी झंडी दिखाकर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बच्चों की रचनात्मकता, अनुशासन, सजावट और प्रस्तुतियों की खुले शब्दों में प्रशंसा की।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा“किलकारी बिहार बाल भवन द्वारा बच्चों को कला, संस्कृति और शिक्षा से जोड़ने का यह प्रयास वाकई सराहनीय है। बच्चों की प्रतिभा और उनकी सीखने की इच्छा आज की इस झांकी में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह संस्था बच्चों को मंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने किलकारी बिहार बाल भवन की पूरी टीम को बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु किए जा रहे निरंतर प्रयासों के लिए बधाई दी।

कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण रही बच्चों द्वारा विभिन्न कार्टून कैरेक्टर्स, सांस्कृतिक स्वरूपों तथा विधा-आधारित वेशभूषाओं में सजकर प्रस्तुत की गई झांकी, जिसने बच्चों की सृजनात्मकता, कल्पनाशीलता और प्रतिभा को सुंदर रूप से प्रदर्शित किया। झांकी का यह मिश्रित स्वरूप—सांस्कृतिक, शैक्षणिक और मनोरंजक—सभी के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। झांकी की तैयारी में बच्चों ने बेहद उत्साह दिखाया और अपनी कलात्मक दक्षता का शानदार परिचय दिया और विधा संबंधी स्लोगन भी अपने साथ प्रदर्शित किए, जिनमें“संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार”, “किलकारी मन को भाती है, खुशियाँ जीवन में लाती है“, “कला से सजे बचपन के सपने, किलकारी से गूंजे जीवन अपने”, “संस्कृति और कला का अनूठा मेल, किलकारी में होता ज्ञान का खेल।

इस अवसर पर किलकारी बिहार बाल भवन, सहरसा के प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक प्रणव भारती सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी मधु कुमारी, सहायक लेखा पदाधिकारी विश्व विजय झा, नामांकन प्रभारी मौसमी कुमारी, हस्तकला प्रशिक्षक विकास भारती, तबला प्रशिक्षक निभाष कुमार, नृत्य प्रशिक्षिका आर्ची कुमारी, कंप्यूटर प्रशिक्षिका शिखा कुमारी, चित्रकला प्रशिक्षिका अन्नू कुमारी, कराटे प्रशिक्षक राम कुमार, बाल सहयोगी आयुष राज तथा अन्य शामिल रहे और बाल भवन के नियमित, अनुशासित, सृजनशील बच्चों ने वालंटियर के रूप में सहयोग प्रदान किया जिसमें अमित कुमार, सत्यम कुमार, अभिषेक कुमार, गौरव कुमार, कृष कुमार एवं अन्य बच्चों ने झांकी के दौरान सहयोग प्रदान किया।

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