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हरतालिका तीज पर महिलाओं का निर्जल व्रत, शिव-पार्वती की पूजा से मांगी पति की लंबी उम्र

जिले में आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया पर्व, रात्रि जागरण व भजन-कीर्तन से गूंजे मंदिर

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Monday, September 1, 2025

ब्यूरो चीफ रजनी कांत पांडेय चंदौली। भादो मास की शुक्ल तृतीया पर मंगलवार को जनपद में श्रद्धा और आस्था के साथ हरतालिका तीज का पर्व मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जल रहकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की तथा पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना किया।

सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों, लाल-पीली साड़ियों, चुनरियों और संपूर्ण श्रृंगार के साथ व्रत रखा। हाथों में लगी मेहंदी और चूड़ियों की खनक ने उत्सव का उल्लास और बढ़ा दिया। मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही और पूजा-पाठ का दौर चलता रहा।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज का नाम माता पार्वती की तपस्या से जुड़ा है। कहा जाता है कि शिवजी को पति रूप में पाने की कठोर साधना के दौरान उनकी सहेलियों ने उनका अपहरण कर लिया था। ‘हरत’ का अर्थ है अपहरण करना और ‘आलिका’ का अर्थ है सहेली। इसी कारण इस व्रत को हरतालिका तीज कहा जाता है।
व्रत के दौरान दिनभर महिलाएं उपवास करती हैं और रात्रि जागरण में भजन-कीर्तन कर वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं। मंदिरों में देवी-देवताओं की स्तुति और लोकगीतों की स्वर-लहरियों से देर रात तक श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा।

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