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सोनपुर पंचायत की बदहाल व्यवस्था पर ग्रामीणों का फुटा आक्रोश

सरपंच सचिव की कथित निष्कियता से विकास कार्य प्रभावित समस्याओं के निराकरण की मांग तेज

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Saturday, August 29, 2026

पुलकित दास महंत प्रदेश स्टेट प्रभारी छत्तीसगढ़ दैनिक अयोध्या टाइम्स समाचार पत्र

जिला रायगढ़ धरमजयगढ़। जनपद पंचायत धरमजयगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनपुर में पंचायत व्यवस्था की कथित निष्क्रियता को लेकर ग्रामीणों और युवाओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। गांव की बदहाल सड़कों, कीचड़ और गड्ढों से परेशान युवाओं ने आखिरकार पंचायत की ओर देखने के बजाय खुद ही मोर्चा संभाल लिया। वहीं शनिवार को गांव के युवाओं ने आपसी सहयोग से चंदा एकत्रित किया और गांव के ही ट्रैक्टर में डीजल डलवाकर मुरूम मंगाया। इसके बाद सोनपुर से गीतखोंता पंडोपारा जाने वाले कच्चे मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढों और दलदल में मुरूम डालकर सड़क को आवागमन योग्य बनाने का काम शुरू कर दिया। जिस काम की जिम्मेदारी पंचायत के जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रशासन की मानी जाती है, उसे ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर पर करना अब ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गया है।

सरपंच साहब जवाब दीजिए… मौन क्यों हैं?’

बता दें, ग्रामीणों का कहना है कि गांव की बदहाल स्थिति को लेकर सरपंच और सचिव को कई बार मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन आरोप है कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद युवाओं और ग्रामीणों ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी।गांव के व्हाट्सएप समूह में पंचायत की कार्यप्रणाली, विकास कार्यों और पंचायत में आने वाली शासकीय राशि के उपयोग को लेकर कई सवाल उठाए गए। युवाओं ने पंचायत भवन की बदहाल स्थिति का हवाला देते हुए पूछा कि जब पंचायत में लाखों रुपये की शासकीय राशि आती है, तो आखिर विकास जमीन पर दिखाई क्यों नहीं देता? सोशल मीडिया पर कुछ युवाओं ने तो यहां तक सवाल दाग दिया – सरपंच साहब जवाब दीजिए, मौन क्यों धारण किए हैं? अगर काम नहीं कर पा रहे हैं तो इस्तीफा दे दीजिए। वहीं कुछ ग्रामीणों ने पंचायत की कथित निष्क्रियता के खिलाफ आंदोलन तेज करने की बात तक कही।

रक्षाबंधन पर भी पंचायत के खिलाफ गूंजा विरोध…

मिली जानकारी अनुसार बता दें, कल बीते शुक्रवार 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व था। लेकिन इसी दौरान ग्राम पंचायत सोनपुर में सरपंच-सचिव की कथित निष्क्रियता को लेकर ग्रामीणों और युवाओं का विरोध सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा। वहीं ग्रामीणों के आरोपों के बीच पंचायत में विकास कार्यों के लिए आने वाली राशि और उसके आहरण को लेकर भी सवाल उठाए गए। हालांकि इन आरोपों पर सरपंच-सचिव की ओर से सोशल मीडिया समूह में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। वहीं विरोध के बीच क्षेत्रीय जनपद सदस्य विनय शर्मा (बीडीसी) ने ग्रामीणों और युवाओं को ग्राम सभा में अपनी बात रखने की सलाह देते हुए मामले को उचित मंच पर उठाने की बात कही, लेकिन फिर ग्रामीणों युवाओं का आक्रोश लगातार कमेंट चलता रहा।

पंचायत में लाखों की राशि, फिर सड़क पर ग्रामीणों का चंदा क्यों?

यह सवाल अब सबसे बड़ा बन गया है। यदि पंचायत में विकास के लिए शासन से राशि आती है, तो ग्रामीणों को सड़क सुधारने के लिए खुद चंदा क्यों जुटाना पड़ रहा है? यदि पंचायत प्रशासन सक्रिय है, तो गांव की मुख्य आवाजाही वाली सड़कें गड्ढों और कीचड़ में क्यों तब्दील हैं? और यदि ग्रामीण बार-बार अपनी समस्या बता रहे थे, तो पंचायत के जिम्मेदार लोग मौके पर क्यों नहीं पहुंचे? इन सवालों ने सोनपुर की पंचायत व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

युवाओं ने सड़क सुधारी, लेकिन सरपंच-सचिव नदारद..

वहीं आज जब युवाओं ने स्वयं सड़क पर उतरकर गड्ढे पाटने और मुरूम बिछाने का काम शुरू किया, तब भी ग्रामीणों के अनुसार सरपंच-सचिव मौके पर पहुंचकर स्थिति देखने तक नहीं आए।यह दृश्य अपने आप में पंचायत व्यवस्था पर एक तीखा सवाल बन गया है,जिस जनता ने भरोसा जताकर जनप्रतिनिधि चुना, उसी जनता को अपनी सड़क के लिए खुद चंदा जुटाकर मरम्मत करनी पड़े, तो फिर पंचायत प्रतिनिधित्व का अर्थ क्या रह जाता है? ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच को जनता ने गांव के विकास के लिए चुना है, न कि केवल पद पर बने रहने के लिए। हालांकि पंचायत में विकास राशि के दुरुपयोग अथवा निजी हित में इस्तेमाल के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

ग्रामीणों का श्रम बना पंचायत की निष्क्रियता का आईना

सोनपुर के युवाओं द्वारा जिस तरह अपने संसाधनों से सड़क के गड्ढे भरने का बीड़ा उठाया गया है, वह केवल सड़क मरम्मत का प्रयास नहीं बल्कि पंचायत व्यवस्था के सामने जनता का मौन लेकिन बेहद तीखा सवाल भी है। वहीं जिस सड़क पर पंचायत को विकास की नींव रखनी थी, वहां आज ग्रामीण अपने हाथों से मुरूम बिछा रहे हैं। यह तस्वीर अगर पंचायत की सफलता है तो सवाल क्यों उठ रहे हैं? और अगर यह पंचायत की विफलता नहीं है, तो फिर ग्रामीणों को खुद सड़क बनाने की नौबत क्यों आई? सोनपुर में उठती ग्रामीणों की आवाज अब केवल सड़क तक सीमित नहीं रह गई है। यह आवाज पंचायत की कार्यप्रणाली, विकास कार्यों और शासकीय राशि के उपयोग पर जवाबदेही मांग रही है।

अब देखना यह है कि ग्रामीणों के इन सवालों का जवाब सरपंच-सचिव देंगे या फिर सोनपुर की जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आगे भी खुद ही सड़क पर उतरना पड़ेगा?

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