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कागजों पर जो आशियाना सितारा देवी का था, उसे अफसरों की अनदेखी और बिल्डरों की गुंडागर्दी ने बनाया आंसू का समंदर; पढ़ें निष्पक्ष रिपोर्ट

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Friday, July 17, 2026

संवाददाता: आशीष कश्यप

*लखनऊ

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उदासीन और संवेदनहीन रवैये का एक ऐसा गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला रजनी खण्ड, शारदा नगर योजना के भवन संख्या ई-4/132 का है, जिसकी वैध मालकिन श्रीमती सितारा देवी हैं। पीड़ित परिवार ने अपनी खून-पसीने की गाढ़ी कमाई से कुल ₹3,13,300 की धनराशि का भुगतान कर एलडीए से बकायदा इस संपत्ति की रजिस्ट्री कराई थी। इस सरकारी विलेख (रजिस्ट्री) पर प्राधिकरण के सक्षम अधिकारियों के बकायदा दस्तखत और मुहर मौजूद हैं। इसके बावजूद, आज सितारा देवी और उनके दृष्टिबाधित पति अपनी ही रजिस्ट्रीशुदा 30 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

पीड़ित बुजुर्ग दंपत्ति की शारीरिक लाचारी का अनुचित लाभ उठाते हुए रसूखदार भू-माफियाओं ने अधिकारियों की शिथिलता का फायदा उठाया और उनकी वैध आवंटित जमीन पर अवैध रूप से पूरा स्कूल खड़ा कर दिया। हद तो तब हो गई जब अपनी दिव्यांग पत्नी को जैसे-तैसे संभालते हुए दृष्टिबाधित बुजुर्ग न्याय की आस में एलडीए की ‘जनता अदालत’ पहुंचे। मदद की उम्मीद लेकर पहुंचे इस बुजुर्ग दंपत्ति की फरियाद को अधिकारियों ने पूरी तरह अनसुना कर दिया। सरकारी दस्तावेज हाथ में होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस गंभीर मामले पर त्वरित संज्ञान लेने या तत्काल कार्रवाई करने में कोई रुचि नहीं दिखाई और पीड़ित दंपत्ति को केवल कोरा आश्वासन देकर चलता कर दिया।

वैध आवंटियों की जमीनों की सुरक्षा करने में नाकाम साबित हो रहे प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों की इसी हीलाहवाली के कारण आज राजधानी में अवैध कब्जेदार बेखौफ हैं। सरकारी दस्तावेजों की गरिमा को दरकिनार कर बेबस बुजुर्गों की सुनवाई न करना एलडीए के कार्यप्रणाली की बड़ी चूक को दर्शाता है। प्राधिकरण के इस निराशाजनक रुख से आहत होकर अब पीड़ित दंपत्ति ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जनता दरबार’ का रुख करने का निर्णय लिया है, ताकि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें अपनी ही रजिस्ट्रीशुदा जमीन पर मालिकाना हक मिल सके।

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