
कुशीनगर। तमकुहीराज की राजनीति में ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे जिले की सियासत को झकझोर कर रख दिया है। भाजपा विधायक असीम कुमार की शिकायत के बाद ब्लॉक प्रमुख अनुराधा राय के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए हैं। इस कार्यवाही के बाद सत्ता पक्ष के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है।जिस लड़ाई की चर्चा अब तक केवल राजनीतिक गलियारों में होती थी, वह अब प्रशासनिक कार्यवाही के रूप में सामने है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिकायत विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के ही विधायक ने की, तो आखिर मामला कितना गंभीर रहा होगा।
एक शिकायत… और बदल गया पूरा राजनीतिक समीकरण
बताया जा रहा है कि मुन्नीपट्टी गांव में स्कूल और अस्पताल के लिए आरक्षित भूमि पर खेल मैदान निर्माण तथा मनरेगा और 15 वें वित्त आयोग की धनराशि के कथित दुरुपयोग को लेकर विधायक असीम कुमार ने शासन स्तर पर शिकायत की थी।शिकायत के बाद जांच हुई और कार्यवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी क्रम में ब्लॉक प्रमुख के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए। इस फैसले ने जिले की पंचायत राजनीति में भूचाल ला दिया है।
क्या यह भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही है या वर्चस्व की लड़ाई...
राजनीतिक हलकों में अब दो तरह की चर्चाएं हैं। एक पक्ष इसे सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के खिलाफ उठाया गया कदम बता रहा है, जबकि दूसरा इसे भाजपा के भीतर राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देख रहा है।एक ओर जनप्रतिनिधि के रूप में विधायक की राजनीतिक पकड़ है, तो दूसरी ओर ब्लॉक प्रमुख का पंचायत स्तर पर मजबूत नेटवर्क। ऐसे में यह मामला सिर्फ प्रशासनिक कार्यवाही तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा के लिए बढ़ी असहजता..
इस घटनाक्रम ने भाजपा संगठन को भी असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। विपक्ष सवाल उठा रहा है कि यदि पार्टी के ही विधायक की शिकायत पर इतनी बड़ी कार्यवाही हो सकती है, तो अन्य मामलों की भी जांच क्यों न हो।हालांकि, इस पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
जिलाधिकारी की अंतिम जांच पर टिकी निगाहें…
राज्यपाल स्तर से हुई कार्यवाही के बाद अब जिलाधिकारी को अंतिम जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो आगे और भी प्रशासनिक तथा कानूनी कार्यवाही हो सकती है।फिलहाल तमकुहीराज की चौपालों, बाजारों और राजनीतिक गलियारों में सिर्फ एक ही चर्चा है—क्या यह भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही है, या भाजपा के भीतर सत्ता और वर्चस्व की सबसे बड़ी सियासी लड़ाई?
अंतिम जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि यह मामला केवल एक ब्लॉक प्रमुख के अधिकारों तक सीमित रहेगा या आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों की राजनीति की दिशा भी बदल देगा।इस रिपोर्ट में वर्णित आरोप शिकायत और जांच प्रक्रिया से संबंधित हैं। अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी की अंतिम जांच रिपोर्ट और आगे की वैधानिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
जिला संवाददाता/मान्धाता कुशवाहा “दैनिक अयोध्या टाइम्स”




