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आजादी से पूर्व कलम बनी चेतना की मशाल

हिंदी विभाग के शताब्दी समारोह में साहित्य और पत्रकारिता की भूमिका पर मंथन, : बीएसएसडी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन , बुद्ध, गांधी और राष्ट्रनिर्माण में पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका पर चर्चा

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Tuesday, February 24, 2026

Before independence, the pen became the torch of consciousness.

कानपुर। (प्रमुख संवाददाता- हरिओम द्विवेदी): सोमवार- नवाबगंज स्थित बीएसएसडी कॉलेज के हिंदी विभाग के स्थापना शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में साहित्य और पत्रकारिता की राष्ट्रनिर्माण में भूमिका पर गंभीर विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व पत्रकारिता ने देश में राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का कार्य किया और आजादी के बाद भी राष्ट्र के निर्माण में मार्गदर्शक बनी रही।

संगोष्ठी का विषय “समकालीन हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता का राष्ट्र-निर्माण में योगदान” रखा गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व सांसद तरुण विजय उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की आत्मा है और पत्रकारिता उसकी आवाज़। दोनों मिलकर राष्ट्र की दिशा तय करते हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. संतोष भदौरिया ने गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी की विचारधारा पर शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों ने समाज में नैतिक चेतना और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पत्रकारिता ने सत्य और न्याय की आवाज़ को जन-जन तक पहुँचाया। प्राचार्या प्रो. नील टंडन ने हिंदी साहित्य को सांस्कृतिक अस्मिता का आधार बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों में राष्ट्रीय दृष्टि और बौद्धिक परिपक्वता विकसित करते हैं।

उन्होंने विभाग की गौरवशाली परंपरा, शोध-साधना और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर सीपी नेत्री सिंह, प्रो. आनंद शुक्ला, डॉ. नीलिमा सिंह, डॉ. शिव कुमार दीक्षित, डॉ. रमेश चंद्र शर्मा सहित अनेक शिक्षाविदों ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता समाज में सकारात्मक परिवर्तन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया तथा शोधपत्रों का संकलन भी जारी किया गया।

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