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सोनभद्र: ग्रामीण संपत्तियों का ‘आधार’ बनी घरौनी, विवादों से मिलेगी मुक्ति

प्रदेश के 90 हजार से अधिक गाँवों में ड्रोन सर्वे पूरा; अब तक 1 करोड़ से ज्यादा परिवारों को मिला मालिकाना हक

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Friday, February 20, 2026

सोनभद्र (अमान खान ब्यूरो चीफ): ​उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्वामित्व को लेकर होने वाले विवादों को खत्म करने के लिए योगी सरकार की ‘स्वामित्व योजना’ मील का पत्थर साबित हो रही है। ग्रामीण आबादी क्षेत्र की जमीनों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड न होने के कारण होने वाली मुकदमेबाजी को रोकने के लिए सरकार अब हर ग्रामीण मकान को एक अद्वितीय आईडी (घरौनी) प्रदान कर रही है।

कैसे तैयार होती है आपकी ‘घरौनी’?

  • ड्रोन सर्वे: अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक के जरिए आबादी क्षेत्र का सटीक मानचित्र तैयार किया जाता है।
  • पारदर्शी प्रक्रिया: ग्राम सभा की बैठक में संपत्तियों का चिन्नीकरण कर सूची प्रकाशित की जाती है, जिस पर ग्रामीण अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
  • विवाद निपटारा: एसडीएम और जिलाधिकारी स्तर पर आपसी सुलह-समझौते और सुनवाई के आधार पर त्रुटियों का निस्तारण किया जाता है।

योजना की अब तक की प्रगति:

  • सर्वेक्षण: प्रदेश के लक्षित सभी 90,530 ग्रामों का ड्रोन सर्वे दिसंबर 2025 तक सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।
  • वितरण: अब तक 71,344 गाँवों में 1,09,11,057 (एक करोड़ से अधिक) घरौनियां तैयार कर ग्रामीणों को सौंपी जा चुकी हैं।

घरौनी के लाभ:

घरौनी मिलने से ग्रामीणों को न केवल अपने घर का कानूनी मालिकाना हक मिल रहा है, बल्कि भविष्य में इस दस्तावेज के माध्यम से बैंकों से ऋण (Loan) लेना और संपत्ति की खरीद-बिक्री करना भी आसान हो जाएगा।

जिला सूचना कार्यालय, सोनभद्र द्वारा जनहित में जारी।

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